
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
अगस्त्यमुनि/रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। समावेशी शिक्षा की भावना को साकार करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रतिभा को पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 को अगस्त्यमुनि के क्रीड़ा मैदान में विकासखंड स्तरीय एकीकृत क्रीड़ा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विकासखंड अगस्त्यमुनि की विभिन्न न्याय पंचायतों से आए विशेष आवश्यकता वाले छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी खेल प्रतिभा,आत्मविश्वास और लगन का परिचय दिया। कार्यक्रम का आयोजन खंड परियोजना अधिकारी तनुजा देवराड़ी के नेतृत्व में संपन्न हुआ। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को खेलकूद के माध्यम से अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करना तथा उनमें आत्मविश्वास,सहयोग,सहभागिता और खेल भावना का विकास करना रहा। आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, जिसे उचित अवसर,प्रोत्साहन और सहयोग के माध्यम से निखारा जा सकता है। कार्यक्रम समन्वयक एवं संकुल संसाधन केंद्र सतेराखाल के समन्वयक चैतन्य कुकरेती ने उपस्थित अभिभावकों और शिक्षकों से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को इस प्रकार के आयोजनों में अधिकाधिक प्रतिभाग कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों की छिपी प्रतिभा को सामने लाने,आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों,शिक्षकों और शिक्षा विभाग का आपसी सहयोग अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन विकासखंड समन्वयक विकास सिंह,चैतन्य कुकरेती तथा संकुल संसाधन केंद्र अगस्त्यमुनि की शिवानी ने किया। प्रतियोगिता में बच्चों के साथ उनके मार्गदर्शक शिक्षक,अनुरक्षक और अभिभावक भी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन कर उनका मनोबल बढ़ाया। पांच खेलों में बच्चों ने दिखाया दमखम चम्मच दौड़,गुब्बारा संतुलन,शंकु गेंदबाजी,लक्ष्य भेदन तथा औषधीय गेंद फेंक सहित पांच खेल आयोजित किए गए। बच्चों की आयु के आधार पर कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग निर्धारित किए गए थे। आयोजन में कुल नौ छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिताओं के परिणाम-चम्मच दौड़ कनिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज की अंशिका ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। गवर्नमेंट विद्यालय पुनाड़ के विपिन द्वितीय तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई दशज्यूला के सिमरन तृतीय स्थान पर रहे। वरिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज कंडारा के किशन ने प्रथम तथा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग की योगिता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। गुब्बारा संतुलन प्रतियोगिता-इस प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग में अंशिका प्रथम,विपिन द्वितीय और सिमरन तृतीय स्थान पर रहे। वरिष्ठ वर्ग में किशन ने प्रथम तथा योगिता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। शंकु गेंदबाजी प्रतियोगिता कनिष्ठ वर्ग में राजकीय इंटर कॉलेज बाड़ा बच्छणस्यूं के आरुष ने प्रथम स्थान हासिल किया। राजकीय इंटर कॉलेज कोठगी की आंशिका तथा राजकीय इंटर कॉलेज कंडारा के अरमान द्वितीय स्थान पर रहे,जबकि राजकीय इंटर कॉलेज कंडारा की आलिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वरिष्ठ वर्ग में किशन प्रथम और योगिता द्वितीय स्थान पर रहीं। लक्ष्य भेदन प्रतियोगिता-कनिष्ठ वर्ग में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई दशज्यूला के सिमरन ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय इंटर कॉलेज बाड़ा बच्छणस्यूं के आरुष द्वितीय तथा पुनाड़ के विपिन तृतीय स्थान पर रहे। वरिष्ठ वर्ग में किशन ने प्रथम और योगिता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। औषधीय गेंद फेंक प्रतियोगिता कनिष्ठ वर्ग में पुनाड़ के विपिन ने प्रथम स्थान हासिल किया। एपीआईसी गंगानगर के अनुराग द्वितीय तथा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई दशज्यूला के सिमरन तृतीय स्थान पर रहे। वरिष्ठ वर्ग में किशन प्रथम और योगिता द्वितीय स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए समान अवसर,प्रोत्साहन और सम्मान मिलना चाहिए। खेलकूद न केवल शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देता है,बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास,सामाजिक सहभागिता,अनुशासन और सकारात्मक सोच विकसित करने में भी सहायक होता है। कार्यक्रम में राजेंद्र प्रसाद,महावीर सिंह,प्रवीण कंडारी,रमेश जगवाण,संगीता परमार,अनूप कुमार सहित अन्य शिक्षक एवं अभिभावक उपस्थित रहे। अगस्त्यमुनि में आयोजित यह प्रतियोगिता समावेशी शिक्षा की दिशा में एक सराहनीय पहल रही। ऐसे आयोजन समाज को यह प्रेरणा देते हैं कि प्रत्येक बच्चे की क्षमता का सम्मान करते हुए उसे आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए,क्योंकि उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलने पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चे भी अपनी प्रतिभा से नई पहचान बना सकते हैं।