हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा देने की पहल के तहत इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा 28-29 अप्रैल 2026 को प्रोडक्ट-मार्केट फिट,प्रोटोटाइप/प्रोसेस डिजाइन एवं MVP डेवलपमेंट विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला ने छात्रों को न केवल शैक्षणिक ज्ञान से आगे बढ़कर व्यावहारिक दुनिया की समझ दी,बल्कि उन्हें स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया। कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी रही,जो इसकी सफलता का प्रमाण है। कार्यक्रम का शुभारंभ IIC के संयोजक डॉ.भास्करन द्वारा रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए किया गया। उन्होंने वर्तमान समय में नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज का युग विचारों को व्यवसाय में बदलने का है। वहीं IIC अध्यक्ष प्रो.एन.गोविंदन ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्हें कार्यशाला में सक्रिय रूप से जुड़ने और सीखने के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला का संचालन टिहरी परिसर की डॉ.प्रिया रॉय चौधरी (संयोजक) एवं डॉ.शिवानी उनियाल (सह-संयोजक) ने कुशलतापूर्वक किया। पहले दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को अत्याधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया। कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ.अंजन कुमार दासगुप्ता ने ड्रोन आधारित पादप वर्गीकरण विषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि कैसे मल्टीस्पेक्ट्रल एवं RGB कैमरों से युक्त ड्रोन तकनीक के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में भी पौधों की सटीक पहचान संभव हो रही है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडल-CNN,YOLO और Vision Transformers के उपयोग को विस्तार से समझाया,जिससे कृषि,वन अनुसंधान और पर्यावरण संरक्षण में नई संभावनाएं खुल रही हैं। इसके बाद निकोलस कोपरनिकस विश्वविद्यालय पोलैंड की डॉ.वियोरिका रैलेन ने प्रकृति से चिकित्सा तक विषय पर व्याख्यान देते हुए बायोमेडिकल क्षेत्र में बोवाइन संसाधनों के उपयोग और नैनोपार्टिकल आधारित उत्पाद विकास की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए जा सकते हैं। दूसरे दिन कोलकाता के बांगाबासी इवनिंग कॉलेज के डॉ.गौर गोपाल सतपति ने शैवाल आधारित उत्पाद एवं सर्कुलर बायोइकोनॉमी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शैवाल और सायनोबैक्टीरिया से कॉस्मेटिक्स,नैनो-फर्टिलाइज़र और कागज जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं,जो पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी हैं। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए नवाचारी प्रोटोटाइप रहे। लगभग 10 छात्रों ने हेल्थकेयर,बायोटेक्नोलॉजी एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने अभिनव मॉडल प्रस्तुत किए,जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया। इन प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि विश्वविद्यालय के छात्र नवाचार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कार्यशाला के अंत में स्टार्टअप गतिविधि समन्वयक डॉ.विनीत कुमार मौर्य ने सभी वक्ताओं,आयोजकों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान देती हैं,बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और उद्यमी बनने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। पूरे कार्यक्रम के दौरान इंटरएक्टिव सत्र,केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक उत्पाद विकास,बाजार की समझ और स्टार्टअप ढांचे से परिचित कराया गया। यह कार्यशाला गढ़वाल विश्वविद्यालय में नवाचार,शोध और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।