इंदिरा गांधी पार्क बना अवैध पार्किंग का गढ़-प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी/नरेंद्र सिंह कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद टिहरी गढ़वाल के विकास खण्ड कीर्तिनगर में स्थित मुख्य बाजार का इंदिरा गांधी पार्क,जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट और बुजुर्गों की सुकूनभरी बैठकों का अहम

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी/नरेंद्र सिंह

कीर्तिनगर/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद टिहरी गढ़वाल के विकास खण्ड कीर्तिनगर में स्थित मुख्य बाजार का इंदिरा गांधी पार्क,जो कभी बच्चों की खिलखिलाहट और बुजुर्गों की सुकूनभरी बैठकों का अहम केंद्र हुआ करता था,अब अपनी मूल पहचान खोता जा रहा है। हालात यह हैं कि यह पार्क आजकल अवैध वाहन पार्किंग के अड्डे में तब्दील हो चुका है। पार्क के भीतर चारों ओर खड़े वाहनों ने न केवल पार्क की सुंदरता पर दाग लगाया है,बल्कि स्थानीय जनमानस में नाराजगी भी बढ़ा दी है। इंद्रा गांधी पार्क जिसे तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री स्व.बर्फिया लाल जुवाटा के पहल से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की स्मृति में बनाया गया था,आज अपनी मूल उद्देश्य से बिल्कुल अलग दिशा में चला गया है। जहां कभी बच्चे खेला करते थे,बुजुर्ग खुले वातावरण में बैठकर वक्त बिताते थे,वहीं आज मोटरसाइकिलों और कारों की भरमार ने पार्क को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर पंचायत या प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। लोगों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर अनजान बन रहा है या किसी मजबूरी में आंखें मूंदे बैठा है। नगर पंचायत कीर्तिनगर और स्थानीय प्रशासन की खामोशी अब सवालों के घेरे में है। पार्क में लगातार बढ़ रही वाहन पार्किंग से न केवल पार्क का अस्तित्व खतरे में है,बल्कि स्थानीय नागरिकों के लिए खुले स्थान की कमी भी महसूस की जा रही है। पार्क की यह बदहाल स्थिति नगर निकाय की कार्यप्रणाली पर बड़े प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही है। मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर पंचायत कीर्तिनगर की अधिशासी अधिकारी शालिनी नेगी ने कहा मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। अब इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए मौके पर निरीक्षण किया जाएगा। अवैध वाहन पार्किंग पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। स्थानीय लोगों की मांग है कि यहां फिर से बच्चों के खेल और बुजुर्गों के विश्राम हेतु सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाए। नगर पंचायत नियमित निगरानी सुनिश्चित करे,ताकि भविष्य में पार्क का दुरुपयोग न हो। जिस पार्क को समाज के लिए बनाया गया था,वही पार्क आज प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ता दिख रहा है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो कीर्तिनगर का यह महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल पूरी तरह अपनी पहचान खो देगा।

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