इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एम.कार्तिकेयन ने एनआईटी श्रीनगर में युवाओं में भरी वैज्ञानिक चेतना की लौ

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के पीछे छिपे कठोर परिश्रम,अनुशासन और शत-प्रतिशत शुद्धता के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एम.कार्तिकेयन ने

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों के पीछे छिपे कठोर परिश्रम,अनुशासन और शत-प्रतिशत शुद्धता के सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.एम.कार्तिकेयन ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान उत्तराखंड में विद्यार्थियों को एक अत्यंत प्रेरक और ज्ञानवर्धक व्याख्यान से अभिभूत किया। इसरो में रॉकेट एवं उपग्रह प्रणोदन की चुनौतियां विषय पर आयोजित इस विशेष व्याख्यान में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा अंतरिक्ष में किसी भी प्रणाली के लिए दूसरा अवसर नहीं होता। हर प्रणाली को पहली बार में हर बार सफल होना ही होता है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी श्रीनगर के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग द्वारा आयोजित किया गया,जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों,शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने सहभागिता की। शून्य-दोष और विश्वसनीयता ही सफलता का मंत्र वैज्ञानिक-जी एवं उपग्रह प्रणोदन तंत्र गुणवत्ता आश्वासन समूह प्रमुख डॉ.कार्तिकेयन ने कहा कि अंतरिक्ष अभियानों की सफलता का मूल आधार है। उन्होंने बताया कि उपग्रह प्रणोदन प्रणाली किसी भी मिशन की रीढ़ होती है। यदि इसमें तनिक भी त्रुटि रह जाए तो वर्षों की मेहनत क्षण भर में व्यर्थ हो सकती है। इसीलिए प्रत्येक पुर्जे का सूक्ष्म परीक्षण,विफलता प्रकार एवं प्रभाव विश्लेषण तथा सटीक विश्वसनीयता आकलन अनिवार्य किया जाता है। ऐतिहासिक अभियानों से जुड़े चार दशक का अनुभव वर्ष 1987 से इसरो से जुड़े डॉ.कार्तिकेयन ने अपने लगभग चार दशकों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 70 से अधिक उपग्रह प्रणोदन प्रणालियों के विकास एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे भारत के अनेक ऐतिहासिक अभियानों से जुड़े रहे हैं,जिनमें शामिल हैं Chandrayaan-1 Mars Orbiter Mission Chandrayaan-2,Chandrayaan-3,Aditya-L1,Gaganyaan इन अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं,बल्कि राष्ट्र के आत्मविश्वास और वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो.के.के.शुक्ला ने की। उन्होंने इसरो की वैश्विक उपलब्धियों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल परीक्षा-केन्द्रित अध्ययन तक सीमित न रहें,बल्कि अनुसंधान और नवाचार को अपने जीवन का लक्ष्य बनाएं। कार्यक्रम का समन्वयन अधिष्ठाता योजना एवं विकास प्रो.विवेक श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान अकादमिक संस्थानों और राष्ट्रीय अनुसंधान संगठनों के मध्य सशक्त सेतु का कार्य करते हैं और विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से उच्च स्तरीय वैज्ञानिक अभियानों से जोड़ते हैं। व्याख्यान के उपरांत आयोजित संवाद सत्र अत्यंत रोचक रहा। विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष प्रणोदन,विश्वसनीयता मॉडलिंग,जोखिम प्रबंधन तथा संभावित शोध सहयोग जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। डॉ.कार्तिकेयन ने सरल और प्रेरक शैली में सभी प्रश्नों के उत्तर दिए,जिससे युवा अभियंताओं में नई ऊर्जा का संचार हुआ। यह आयोजन केवल एक व्याख्यान नहीं,बल्कि एक वैज्ञानिक चेतना का जागरण था। इसने यह संदेश स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल तकनीक नहीं,बल्कि अनुशासन,समर्पण और राष्ट्रभक्ति का संगम है। एनआईटी उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम संस्थान की अनुसंधान संस्कृति को सुदृढ़ करने और नई पीढ़ी के अभियंताओं को भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में योगदान देने हेतु प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। डॉ.कार्तिकेयन के शब्दों ने युवा मनों में यह विश्वास जगा दिया कि यदि संकल्प अटल हो और तैयारी पूर्ण,तो अंतरिक्ष भी दूर नही।

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