
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। दीपावली के ग्यारह दिन बाद मनाए जाने वाला पारंपरिक लोकपर्व ईगास बग्वाल अब केवल एक पर्व नहीं,बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपरा की पहचान बन चुका है। इस सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से भागीरथी कला संगम के सदस्यों की एक बैठक आज मां भगवती नंदा देवी मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि विगत वर्षों की भांति इस बार भी ईगास भैला कार्यक्रम का भव्य आयोजन 1 नवंबर 2025 की शाम 7 बजे रामलीला मैदान श्रीनगर में किया जाएगा। राजा महिपाल शाह के समय से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने जानकारी देते हुए कहा कि ईगास पर्व का इतिहास बेहद गौरवशाली है। श्रीनगर के राजा महिपाल शाह के शासनकाल में जब तिब्बत की सेना ने आक्रमण किया था,तब वीर माधो सिंह भंडारी के नेतृत्व में गढ़वाली सेना ने अदम्य साहस दिखाते हुए दुश्मनों को परास्त किया। विजय प्राप्त कर जब गढ़वाली सेना लौट रही थी,तो वह घने जंगलों में रास्ता भटक गई। उस रात सैनिकों ने चीड़ की लकड़ी (छिल्लों) से प्रकाश किया और उसी प्रकाश में दीपावली के ग्यारहवें दिन अपने घर पहुंचे। गांव के लोगों ने जब अपने वीरों की विजयी वापसी देखी तो उन्होंने हर्षोल्लास में चीड़ के छिल्लों को जलाकर इस पर्व को मनाया। तभी से यह परंपरा ईगास बग्वाल के रूप में उत्तराखंड की पहचान बन गई। संस्कृति के संरक्षण का संकल्प राजेंद्र प्रसाद बड़थ्वाल ने कहा कि भागीरथी कला संगम का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं,बल्कि अपनी उस लोक-संस्कृति को पुनर्जीवित करना है जो धीरे-धीरे आधुनिकता की चकाचौंध में लुप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा हमारी परंपराएं हमारी पहचान हैं। यदि हमने इन्हें नहीं बचाया तो आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से दूर हो जाएंगी। उन्होंने श्रीनगर और आस-पास के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 1 नवंबर शाम 7 बजे रामलीला मैदान में अवश्य उपस्थित होकर अपने इस लोकपर्व को भव्यता प्रदान करें। कार्यक्रम में होंगे पारंपरिक गीत-संगीत और भैला उत्सव। इस अवसर पर पारंपरिक ढोल-दमाऊं की थाप पर लोकनृत्य,जौं और घी से बने भैला का वितरण और गढ़वाली लोकगीतों की प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन में स्थानीय महिलाओं और युवाओं की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिलेगी। बैठक में रमेश चंद्र थपलियाल,भगवती प्रसाद पुरी,भगत सिंह बिष्ट,दीनबंधु सिंह चौहान,किशोरी लाल नौटियाल,मुकेश नौटियाल,पदवेदर रावत,रवींद्र पुरी,दीपक उनियाल,विजय रावल आदि उपस्थित रहे। ईगास-वीरता,संस्कृति और सामूहिकता का पर्व ईगास बग्वाल न केवल फसल और समृद्धि का उत्सव है,बल्कि यह हमारी वीरता,सामाजिक एकता और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक भी है। भागीरथी कला संगम का यह प्रयास सराहनीय है कि वह इस विरासत को पीढ़ियों तक जीवित रख रहा है।