
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
दिल्ली/देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। दिल्ली में रह रहे उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण (जिओ जारी करने) में हो रही लगातार देरी को लेकर आंदोलनकारियों का गुस्सा एक बार फिर उबाल पर है। उत्तराखंड सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ राज्य आंदोलनकारी फिर से आंदोलन की राह पर लौटने को तैयार दिखाई दे रहे हैं। दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में आंदोलनकारियों ने न केवल चिन्हीकरण में हो रही देरी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया,बल्कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई की कथित निष्क्रियता को लेकर भी गहरी नाराजगी जाहिर की। बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष,प्रवक्ता एवं चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने की। बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार दिल्ली में रह रहे 300 से अधिक वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को जानबूझकर लंबित रखे हुए है। धीरेंद्र प्रताप ने सरकार को जनविरोधी करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि 5 फरवरी तक दिल्ली व राज्य के अन्य हिस्सों में वंचित आंदोलनकारियों के पक्ष में सरकारी जिओ जारी नहीं किया गया,तो आंदोलनकारी समिति दिल्ली से लेकर पूरे उत्तराखंड तक व्यापक आंदोलन शुरू करेगी। अंकिता भंडारी हत्याकांड पर बोलते हुए धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि इतने बड़े जनदबाव के बावजूद यदि सीबीआई अब तक ढंग से कार्रवाई नहीं कर पा रही है,तो यह साफ संकेत है कि सरकार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला उत्तराखंड की जनता की आन-बान-शान से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने उत्तराखंड के तमाम नागरिकों से 8 फरवरी को देहरादून में प्रस्तावित विशाल प्रदर्शन में शामिल होने का आह्वान करते हुए नारा दिया-देहरादून चलो,न्याय दिलाओ। बैठक में उपस्थित पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर कुमार एवं अन्य नेताओं ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाए जाने की मांग दोहराई,जिस पर उत्तराखंड आंदोलनकारियों ने पूरा समर्थन देने और उनके आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर धीरेंद्र प्रताप के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश निर्माण मोर्चा के महासचिव कर्नल सुधीर कुमार,उपाध्यक्ष चंद्रकेतु,उत्तराखंड आंदोलनकारी समिति दिल्ली प्रदेश के संरक्षक अनिल पंत,एम.पी.नवानी,पत्रकार दाताराम चमोली,गीतकार एवं गायक रज्जू बिष्ट,पंचम सिंह रावत,प्रताप थलवाल,राधा आर्य,हरिप्रकाश आर्य,एस.के.जैन,राजीव चौहान,केवल कृष्ण सोलंकी,हरि सिंह,हुकुम सिंह कंडारी,विजेंद्र बिष्ट,रणवीर सिंह पुंडीर,पूरन सिंह रावत सहित अनेक आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। बैठक के दौरान अंकिता भंडारी पर मार्मिक गीत लिखने वाले गायक रज्जू बिष्ट ने जब अपना गीत प्रस्तुत किया,तो मौजूद आंदोलनकारियों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा। वक्ताओं ने संकल्प लिया कि यदि अंकिता भंडारी मामले में न्याय में और देरी हुई,तो जल्द ही नए आंदोलन कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी,जिसके लिए दिल्ली और आसपास के क्षेत्र के लोगों को मानसिक रूप से तैयार रहना होगा। इस बीच जारी एक संयुक्त बयान में धीरेंद्र प्रताप,हरिपाल रावत,अनिल पंत,रणवीर सिंह पुंडीर और मनमोहन शाह ने सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने का स्वागत तो किया,लेकिन साथ ही स्पष्ट कहा कि उन्हें सीबीआई पर भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की कि अंकिता भंडारी मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए,ताकि पीड़िता को वास्तविक न्याय मिल सके।