
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
दिल्ली/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के समय दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में सक्रिय रहे आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर आज उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिति,दिल्ली एनसीआर का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से नई दिल्ली में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का शॉल व पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया,तत्पश्चात एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा,जिसमें दिल्ली एवं एनसीआर के अभिलेखित आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण संबंधी लंबित मामलों के निस्तारण की मांग की गई। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 2008 में उत्तराखंड सरकार ने दिल्ली में एक एसडीएम रैंक अधिकारी को आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए नियुक्त किया था। इसके साथ ही आठ सदस्यीय समिति का गठन किया गया था,जिसने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र के 375 आंदोलनकारियों के नाम चिन्हित कर उनके गृह जनपदों में सत्यापन हेतु भेजे थे। वर्ष 2017 में शासन ने इस प्रक्रिया को पुनः आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया,किंतु अभी तक अंतिम आदेश जारी नहीं हो पाया है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2023 में भी आंदोलनकारियों का एक दल मुख्यमंत्री से सचिवालय में मिला था,किंतु तब भी शासनादेश (जीओ) जारी न हो पाने से आंदोलनकारी वर्ग में निराशा बनी हुई है। पत्र में आग्रह किया गया है कि शासन डीएम स्तर पर विवेकाधिकार और आंदोलनकारी संस्थाओं के प्रमाणन को सम्मिलित करते हुए नया शासनादेश (जीओ) शीघ्र जारी करे,जिससे लम्बे समय से प्रतीक्षित आंदोलनकारियों को न्याय मिल सके। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दिल्ली एनसीआर के आंदोलनकारी न केवल राज्य निर्माण आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में रहे,बल्कि उन्होंने वर्ष 1994 से लेकर 2000 तक लगातार राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन,रैलियां और ज्ञापन अभियानों के माध्यम से आंदोलन को जीवित रखा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि राज्य आंदोलनकारियों के योगदान का उचित मूल्यांकन किया जाएगा और चिन्हीकरण प्रक्रिया को न्यायोचित व पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इस अवसर पर संरक्षक अनिल पंत,अध्यक्ष मनमोहन सिंह,रविंद्र चौहान,किशोर सिंह रावत,कुशल सिंह बिष्ट,शिव सिंह रावत,नरेंद्र बिष्ट और एस.पी.बलूनी सहित समिति के वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। राज्य आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से यह भी अपेक्षा जताई कि आगामी शासनादेश में दिल्ली,गाजियाबाद,गुरुग्राम,नोएडा और फरीदाबाद क्षेत्रों के सत्यापित आंदोलनकारियों को शामिल किया जाए,जिससे राज्य आंदोलन में बाहरी मोर्चों पर सक्रिय रहे साथियों को भी सम्मानपूर्वक पहचान मिल सके। उत्तराखंड आंदोलन केवल राज्य सीमाओं के भीतर नहीं लड़ा गया,बल्कि दिल्ली की सड़कों पर भी उसकी नींव रखी गई थी। अब समय है कि उन सभी सपूतों को भी समान मान्यता मिले।