उमरेश्वर महादेव मंदिर-अकाल मृत्यु से मुक्ति और संतान सुख देने वाला दिव्य धाम

हिमालय टाइम्सगबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की सुरम्य वादियों में देवप्रयाग के समीप पाली गांव में स्थित पौराणिक उमरेश्वर महादेव मंदिर आज भी भक्तों की आस्था का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर अपने

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गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल की सुरम्य वादियों में देवप्रयाग के समीप पाली गांव में स्थित पौराणिक उमरेश्वर महादेव मंदिर आज भी भक्तों की आस्था का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर अपने अद्वितीय बागांभरी शिवलिंग के कारण संपूर्ण गढ़वाल ही नहीं,बल्कि पूरे उत्तराखंड में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। देवप्रयाग का क्षेत्र वैसे भी अनूठा है,क्योंकि यहीं पर अलकनंदा और भागीरथी नदियों का पावन संगम होता है और यहां से गंगा का उद्गम माना जाता है। इस संगम स्थल को देवों का प्रयाग कहा गया है। बुजुर्ग श्रद्धालु बताते हैं कि इस संगम क्षेत्र में स्थित उमरेश्वर महादेव का धाम सदैव से साधु-संतों का आश्रय और साधना का केंद्र रहा है। लोकविश्वास है कि संगम की दिव्य तरंगों और उमरेश्वर धाम की आध्यात्मिक ऊर्जा भक्तों के जीवन से कष्ट हर लेती है। मंदिर के प्राचीन इतिहास के बारे में श्री श्री 108 सूरज गिरी महाराज (जूना अखाड़ा,नागा संन्यासी) बताते हैं कि सदियों पूर्व जब गांव में एक युवक की अकाल मृत्यु हुई,तब स्वयं भगवान भोलेनाथ यहां प्रकट हुए और आशीर्वचन दिया कि यदि किसी परिवार में अकाल मृत्यु का संकट आता है और उसका कोई सदस्य यहां पूजा-अर्चना करता है,तो वह संकट टल जाएगा और परिवार सुरक्षित रहेगा। तभी से यह स्थान अकाल मृत्यु निवारण धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। बागांभरी शिवलिंग से जुड़ी एक और लोक आस्था भी प्रचलित है। यदि किसी दंपत्ति को संतान प्राप्ति में बाधा होती है,तो वह मिट्टी या तांबे के बर्तन में जल भरकर शिवलिंग पर अर्पित करता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और संतानहीन दंपत्ति की गोद हरी-भरी हो जाती है। विशेष तथ्य यह है कि बागांभरी शिवलिंग अपनी तरह का अद्वितीय शिवलिंग है और पूरे भारतवर्ष में केवल यहीं उमरेश्वर महादेव मंदिर,पाली गांव में स्थित है। यही कारण है कि दूर-दराज से भक्त यहां आकर दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन मास और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। इन अवसरों पर 25 से 40 गांवों के श्रद्धालु माताएं,बहनें,युवक और बुजुर्ग मंदिर पहुंचकर भजन-कीर्तन,पूजा-अर्चना और भंडारे में भाग लेते हैं। मंदिर परिसर इन दिनों शिव नाम के जयकारों से गूंज उठता है। पाली गांव के श्रद्धालु मानते हैं कि उमरेश्वर महादेव केवल एक मंदिर नहीं,बल्कि जीवन की कठिनाइयों को दूर करने वाला जीवंत धाम है। बुजुर्ग कहते हैं कि जिसने सच्चे मन से बागांभरी शिवलिंग की परिक्रमा की,उसके जीवन में कभी दरिद्रता,दुख और भय नहीं टिकता। मातृशक्ति का विश्वास है कि सावन में की गई पूजा से पूरे वर्ष परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। वर्तमान में यहां नेत्रहीन महात्मा श्री श्री 108 सूरज गिरी महाराज साधना एवं सेवा कार्यों में रत हैं। उनके पूर्व गुरु संत महात्मा पूर्णा गिरी,श्याम गिरी और शेर गिरी ने भी इस पावन धाम में लंबे समय तक तपस्या कर बागांभरी शिवलिंग की सेवा की। उमरेश्वर महादेव मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है,बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का भी जीवंत स्वरूप है। श्रद्धालु बताते हैं कि जब मंदिर की घंटियां बजती हैं और बम बम भोले के नारे गूंजते हैं,तो ऐसा प्रतीत होता है मानो भगवान शिव स्वयं इस धाम में विराजमान होकर भक्तों का कष्ट हर रहे हों। सच्चे मन से उमरेश्वर महादेव की पूजा करने वाला भक्त यह अनुभव करता है कि भोलेनाथ आज भी अपने भक्तों के दुःख हरने और जीवन संवारने के लिए साक्षात उपस्थित हैं।

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