
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के माध्यम से शोध कौशल का उन्नयन-डेटा विश्लेषण एवं दृश्यांकन पर व्यावहारिक कार्यशाला विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का सफल एवं प्रभावशाली समापन हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक शोध की आवश्यकताओं के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के प्रयोग से डेटा विश्लेषण तथा उसके प्रभावी प्रस्तुतीकरण की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। कार्यशाला में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक सत्रों पर विशेष जोर दिया गया,जिससे प्रतिभागियों को शोध कार्य में सीधे उपयोगी कौशल प्राप्त हो सके। कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो.एम.एम.एस.रौथाण ने इंडिया एआई मिशन की विस्तृत जानकारी देते हुए इसके उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश में एआई आधारित अनुसंधान,नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है,जिससे उच्च शिक्षा और शोध को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.वाई.पी.रैवानी निदेशक आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC), एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि आज के समय में एआई शोध का एक सशक्त और अनिवार्य उपकरण बन चुका है। इसके प्रयोग से शोध की गुणवत्ता,सटीकता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उन्होंने शोधार्थियों से अपील की कि वे एआई आधारित तकनीकों को अपने शोध का अभिन्न हिस्सा बनाएं। प्रो.प्रशांत कंडारी डीन एकेडमिक्स ने कार्यशाला के आयोजन को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे अकादमिक और कौशल विकास कार्यक्रम शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को समृद्ध करते हैं तथा प्रतिभागियों को वैश्विक स्तर की शोध प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करते हैं। कार्यशाला के समन्वयक डॉ.वरुण बड़थ्वाल ने प्रतिभागियों को कार्यशाला की रूपरेखा,उद्देश्यों और सत्रों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान डेटा विश्लेषण,मशीन लर्निंग मॉडल तथा डेटा के दृश्यांकन से जुड़े विभिन्न व्यावहारिक प्रयोग कराए गए,जिनसे प्रतिभागियों को अत्यंत लाभ हुआ। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से आए लगभग 50 प्रतिभागियों ने कार्यशाला में उत्साहपूर्वक सहभागिता की और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आधुनिक शोध तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर डॉ.विनय प्रसाद टम्टा,सहायक प्राध्यापक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों,वक्ताओं,प्रतिभागियों एवं आयोजन से जुड़े शिक्षकों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। कार्यशाला के सफल आयोजन में विभाग के शिक्षक प्रदीप राणा,सागर शाह,अरविंद,संतोष तथा शोध छात्र समर,बृजेश,तुषार,करिश्मा,रीना और श्रुति का विशेष एवं सराहनीय सहयोग रहा। कुल मिलाकर यह कार्यशाला न केवल तकनीकी ज्ञानवर्धन का सशक्त मंच साबित हुई,बल्कि विश्वविद्यालय में एआई और मशीन लर्निंग आधारित शोध संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी रही।