एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में अंतर-महाविद्यालयी प्रतियोगिताओं का आगाज-8 संस्थानों की भागीदारी, प्रतिभाओं का दिखा शानदार संगम

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक बार फिर युवा प्रतिभाओं के उत्साह,रचनात्मकता और बौद्धिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया,जब अंतर-महाविद्यालयी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक बार फिर युवा प्रतिभाओं के उत्साह,रचनात्मकता और बौद्धिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया,जब अंतर-महाविद्यालयी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में विश्वविद्यालय से सम्बद्ध 8 संस्थानों की सक्रिय भागीदारी ने पूरे परिसर को जीवंत और प्रतिस्पर्धात्मक माहौल से भर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग पूनम कठैत द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। उनके साथ अति विशिष्ट अतिथि अमित कुमार मैखण्डी एवं कालीमठ मंदिर के पुजारी ऋषि राम भट्ट भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलपति प्रतिनिधि प्रो.एन.एस.पंवार,प्रो.एम.एस.पंवार,अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाई,कार्यक्रम संयोजक प्रो.अतुल ध्यानी तथा छात्रसंघ पदाधिकारी मंचासीन रहे। मुख्य अतिथि पूनम कठैत ने अपने संबोधन में प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन न केवल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करते हैं,बल्कि उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी कार्य करते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी आत्मसात करें। कार्यक्रम संयोजक प्रो.अतुल ध्यानी ने सभी प्रतिभागी टीमों का स्वागत करते हुए प्रतियोगिताओं की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। वहीं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.ओ.पी.गुसाईं ने कहा कि भविष्य में इन प्रतियोगिताओं को और सुव्यवस्थित एवं समयबद्ध तरीके से आयोजित किया जाएगा,ताकि विश्वविद्यालय की टीमें जोनल और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो.एन.एस.पंवार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और छुपी हुई प्रतिभाओं को उजागर करने का सशक्त माध्यम बनते हैं। इस दौरान संकायाध्यक्ष शैक्षणिक प्रो.मोहन पंवार ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए स्वर्गीय कैप्टन विजयपाल सिंह नेगी को स्मरण किया और प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया। प्रतियोगिताओं के तहत बिड़ला,टिहरी,पौड़ी परिसर सहित डीएवी,डीबीएस,डॉल्फिन आदि संस्थानों की टीमों ने श्रीनगर नगर में भव्य सांस्कृतिक झांकी निकाली। इस झांकी ने शहरवासियों को उत्तराखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति से रूबरू कराया और पूरे शहर को उत्सवमय बना दिया। प्रतियोगिताओं के अंतर्गत सुगम संगीत,वाद-विवाद,काव्यपाठ,शास्त्रीय गायन,चित्रकला सहित विभिन्न साहित्यिक एवं सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गईं,जिनमें प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें 7 टीमों के 14 प्रतिभागियों ने भाग लेते हुए एआई के सामाजिक,शैक्षणिक,तकनीकी और नैतिक पहलुओं पर प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने जहां एक ओर एआई को विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया,वहीं इसके संभावित दुष्प्रभावों और चुनौतियों पर भी गंभीर चिंतन व्यक्त किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चंदोला,पत्रकार एवं लेखक प्रेम पंचोली तथा शिक्षाविद् सरिता उनियाल शामिल रहीं। अनिल चंदोला ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में तार्किक चिंतन,अभिव्यक्ति कौशल और समसामयिक विषयों की समझ को विकसित करती हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रो.अरुण रावत,प्रो.एम.एस.नेगी,डॉ.विजय ज्योति,डॉ.विजयकांत पुरोहित,डॉ.कपिल पंवार,डॉ.संजय पांडे,अरुण बहुगुणा सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समापन अवसर पर यह आयोजन न केवल प्रतिभाओं के प्रदर्शन का मंच बना,बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास,प्रतिस्पर्धा की भावना और सांस्कृतिक चेतना को भी नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ।

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