

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पावन कटकेश्वर महादेव (घसिया महादेव) मंदिर प्रांगण में चल रही शिवमहापुराण की दिव्य कथा के तृतीय दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत समागम देखने को मिला। व्यास पीठ पर विराजमान आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने अपने मधुर वचनों से शिव महिमा,भक्ति की गूढ़ व्याख्या तथा माता सती के त्याग और शिवत्व के सिद्धांत का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा आयोजन में महेश गिरी परिवार का विशेष योगदान रहा,जिन्होंने पूरे आयोजन को भक्तिमय और अनुशासित रूप से संपन्न कराया। आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने बताया कि यज्ञदत्त के पुत्र ने निराहार रहकर भगवान शिव की आराधना की और शिवधाम को प्राप्त हुआ,वहीं गुणनिधि नामक पुत्र ने अपने दूसरे जन्म में कठोर तपस्या कर भगवान शिव से वरदान प्राप्त किया और कुबेर समस्त निधियों का स्वामी बना। कथा के भावपूर्ण प्रसंग में दक्ष प्रजापति की तपस्या और माता दुर्गा के रूप में सती के अवतरण की कथा सुनाई गई। माता सती ने दक्ष को पूर्व चेतावनी दी थी कि जिस दिन तुम मेरे आराध्य का अपमान करोगे,उसी दिन मैं शरीर त्याग दूंगी। परंतु यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित न करने और अपमानित करने पर माता सती ने वृहस्पतिसव यज्ञ में अपने शरीर का त्याग कर दिया। यह करुण प्रसंग सुनकर कथा स्थल पर मौन और श्रद्धा का वातावरण छा गया। आचार्य मधुसूदन घिल्डियाल ने आगे बताया कि भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र द्वारा माता सती के शरीर के अंग पृथक किए,जो जहां-जहां गिरे वे स्थान शक्ति पीठ कहलाए जो आज भी संपूर्ण भारतवर्ष में शक्ति आराधना के तीर्थस्थल हैं। कथा के दौरान हर हर महादेव के जयघोष से पूरा कटकेश्वर महादेव परिसर शिवमय हो उठा। भक्तों ने दिव्य वातावरण में भक्ति,आस्था और भावनाओं का अद्भुत संगम अनुभव किया। इस पावन अवसर पर क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। जिनमें पूरण सिंह धनाई,मनोज भट्ट,नितिन भट्ट,ओम प्रकाश गोदियाल,पंडित आशुतोष पोखरियाल,पंडित मुरली घिल्डियाल,नंद किशोर बलूनी,मनोज बगवाल,संदीप पुरोहित,भुवनेश भट्ट,संदीप उनियाल,नवीन तथा कुल पुरोहित रवि बहुगुणा सहित अनेक भक्त सम्मिलित रहे। आज की कथा का समापन भगवान शिव की महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।