कद्दू वर्गीय सब्जियों में हस्त-परागण-अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता की वैज्ञानिक कुंजी–डॉ.राजेंद्र कुकसाल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। खेती केवल परिश्रम का ही नहीं,बल्कि विज्ञान और समझ का भी परिणाम है। जब प्रकृति की सामान्य प्रक्रियाएं किसी कारणवश बाधित होती हैं,तब किसान को स्वयं वैज्ञानिक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। खेती केवल परिश्रम का ही नहीं,बल्कि विज्ञान और समझ का भी परिणाम है। जब प्रकृति की सामान्य प्रक्रियाएं किसी कारणवश बाधित होती हैं,तब किसान को स्वयं वैज्ञानिक तरीके अपनाकर फसल की सफलता सुनिश्चित करनी पड़ती है। कद्दू वर्गीय सब्जियों में हस्त-परागण (हाथ से परागण) ऐसी ही एक प्रभावी तकनीक है,जो उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण फल प्राप्त करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रही है। पौधों में परागकणों का नर फूल से मादा फूल तक स्थानांतरण परागण कहलाता है। सामान्यत यह कार्य मधुमक्खियों,तितलियों,हवा या अन्य कीटों द्वारा स्वतः हो जाता है। किन्तु जब यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित हो जाती है,तब मनुष्य द्वारा अपने हाथों से परागण कराने की प्रक्रिया को हस्त-परागण कहा जाता है। किसान भाइयों के लिए यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि किन परिस्थितियों में यह तकनीक अपनानी चाहिए-परागण करने वाले कीटों की कमी होने पर जब खेत में मधुमक्खी एवं अन्य सहायक कीट कम हो जाते हैं,तब फूलों में पर्याप्त परागण नहीं हो पाता और फल बनने की संभावना घट जाती है। संरक्षित खेती ग्रीनहाउस/पॉलीहाउस में
ऐसी संरचनाओं में बाहरी कीटों का प्रवेश सीमित होता है,जिससे प्राकृतिक परागण बाधित होता है। इसलिए यहां हस्त-परागण अत्यंत आवश्यक हो जाता है। नर और मादा फूल अलग-अलग होने पर लौकी,तोरी,कद्दू,खीरा,करेला आदि कद्दू वर्गीय फसलों में नर और मादा फूल एक ही बेल पर अलग-अलग होते हैं। ऐसे में सही समय पर परागण न होने से फल-सेट प्रभावित होता है। प्रतिकूल मौसम की स्थिति में अत्यधिक वर्षा तेज हवा अधिक ठंड या भीषण गर्मी के कारण परागण करने वाले कीट सक्रिय नहीं रहते,जिससे प्राकृतिक परागण प्रभावित हो जाता है। फल-सेट कम होने की स्थिति में यदि पौधों में फूल तो आ रहे हों लेकिन फल नहीं बन पा रहे हैं तो यह संकेत है कि हस्त-परागण अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह प्रक्रिया अत्यंत सरल है और किसान इसे आसानी से अपने खेत में अपना सकते हैं-नर फूल की पंखुड़ियों को सावधानीपूर्वक हटाएं,उसमें उपस्थित परागकणों को मादा फूल के वर्तिकाग्र जहां पराग जमा होता है पर हल्के से स्पर्श कराएं। आवश्यकता होने पर मुलायम ब्रश या रुई की डंडी का भी उपयोग किया जा सकता है। हस्त-परागण के प्रमुख लाभ-फल-सेट में वृद्धि-अधिक संख्या में फल बनने लगते हैं। उत्पादन में बढ़ोतरी-कुल उपज में स्पष्ट वृद्धि होती है। फल का आकार,रंग और स्वाद अधिक आकर्षक एवं उत्तम होता है। कद्दू वर्गीय सब्जियों की खेती में हस्त-परागण एक सरल,सुलभ और अत्यंत प्रभावी तकनीक है। थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर किया गया यह कार्य किसानों को बेहतर उत्पादन,उच्च गुणवत्ता और अधिक आय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आज के बदलते कृषि परिवेश में जहां प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है,वहां ऐसी वैज्ञानिक विधियों को अपनाना ही सफलता की कुंजी है।

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