
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। साहित्य की दुनिया में कई मंच ऐसे होते हैं जो रचनाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं,किंतु कविता कारवां एक ऐसा अनूठा मंच है जो साहित्य प्रेमियों को दूसरों की श्रेष्ठ रचनाओं को पढ़ने और सुनाने के लिए प्रेरित करता है। बीते लगभग दस वर्षों से निरंतर जारी इस काव्य यात्रा ने उत्तराखण्ड के विभिन्न नगरों में साहित्यिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की है। प्रारम्भ में क से कविता के नाम से संचालित यह साहित्यिक पहल समय के साथ विकसित होकर कविता कारवां के रूप में स्थापित हुई। इस मंच की विशेषता यह है कि इसमें प्रतिभागियों को स्वरचित कविता के बजाय अपने प्रिय कवि की रचना का चयन कर उसे अपने अंदाज में प्रस्तुत करना होता है। इस अनूठी परंपरा के माध्यम से साहित्य प्रेमियों को अन्य रचनाकारों की रचनाओं से जुड़ने,उन्हें पढ़ने और समझने का अवसर मिलता है। कविता कारवां का मूल उद्देश्य साहित्य के प्रति व्यापक रुचि पैदा करना और पाठकीय संस्कृति को प्रोत्साहित करना है। यह मंच उन लोगों को भी अवसर प्रदान करता है जो स्वयं कविता नहीं लिखते,किंतु कविता पाठ की गहरी रुचि और लालसा रखते हैं। इस प्रकार यह मंच आत्ममुग्धता,आत्म-प्रशंसा और संकुचित साहित्यिक दृष्टि से ऊपर उठकर श्रेष्ठ कविताओं के सामूहिक रसास्वादन का माध्यम बनता जा रहा है। समय के साथ यह काव्य यात्रा हल्द्वानी,रुड़की,पौड़ी,उत्तरकाशी,देहरादून,कौसानी,पंतनगर से लेकर श्रीनगर गढ़वाल सहित अनेक नगरों और कस्बों में लोकप्रिय होती जा रही है। प्रत्येक माह आयोजित होने वाली इसकी बैठकें साहित्य प्रेमियों के लिए एक सांस्कृतिक और बौद्धिक उत्सव का रूप ले चुकी हैं। इसी क्रम में 13 मार्च 2026 शुक्रवार सायं 6 बजे श्रीनगर गढ़वाल में कवि नीरज नैथानी के आवास (निकट चौरास पुल,बद्रीनाथ मार्ग) पर माह मार्च की कविता कारवां बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर नगर के अनेक साहित्य प्रेमियों ने प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं का भावपूर्ण पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ रंगकर्मी विमल बहुगुणा ने भगवान शिव की स्तुति का भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया। शिव सिंह नेगी ने हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध कविता जो बीत गई सो बात गई का प्रभावशाली पाठ किया। वहीं अजय प्रकाश चौधरी ने सुबोध कुमार पुण्डीर सरित की देशभक्ति से ओतप्रोत कविता है देश ही ईश्वर,देश ही अल्लाह सुनाकर वातावरण को ओजस्वी बना दिया। कौशल्या नैथानी ने हरिवंश राय बच्चन की कविता का पाठ किया,जबकि डॉ.एम.एन.नौडियाल ने मुकेश आलम की कविता मेरी आंख में जब भी प्रस्तुत की। माधुरी नैथानी ने शम्भू मनोहर की प्रेरणादायक कविता है अंधेरे सामने तो प्रात तो करनी पड़ेगी सुनाई। नगर निगम के सम्मानित पार्षद प्रवेश चमोली ने सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध कविता यह धरती कितना देती है का वाचन किया। वहीं अनीता नौडियाल ने पंत की ही कविता घट का सस्वर पाठ किया। कार्यक्रम के संयोजक नीरज नैथानी ने फिरोज खान की कविता भले मुझे निष्कासित कर दो इस मुल्क दुनिया जहान से का प्रभावशाली पाठ किया। पूनम थपलियाल ने सुधान सिंह कैंतुरा की कविता प्रस्तुत की। बैठक में ऑनलाइन माध्यम से भी सहभागिता रही,जिसमें डॉ.सम्पूर्ण सिंह रावत ने सुरेश पंत की कविता आज फिर एक चादर आषाढ़ ने ओढ़ ली है का पाठ किया। वहीं डॉ.आर.पी.थपलियाल ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता कलम आज उनकी जय बोल सुनाकर श्रोताओं में नई ऊर्जा का संचार किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने कविता कारवां को साहित्यिक संवाद,काव्य-संवेदना और पाठकीय संस्कृति का सशक्त मंच बताते हुए इसे निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। श्रीनगर में यह मंच अब साहित्यिक सरोकारों की एक सशक्त परंपरा के रूप में स्थापित होता जा रहा है,जहां हर माह कविता के माध्यम से संवेदना, विचार और संस्कृति का नया अध्याय लिखा जा रहा है।