
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से जुड़े एक गंभीर और संवेदनशील मामले ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह की फोटो का उपयोग कर अज्ञात व्यक्ति द्वारा व्हाट्सऐप पर भ्रामक संदेश भेजे जा रहे हैं। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा संज्ञान लेते हुए श्रीनगर कोतवाली में आधिकारिक तहरीर दर्ज कराई है। कोतवाली में दी गई तहरीर में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.राकेश कुमार ढोड़ी ने स्पष्ट कहा कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह की फोटो लगाकर मोबाइल से व्हाट्सऐप संदेश भेजे जा रहे हैं,जिनका उद्देश्य उनकी छवि धूमिल करना और भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। यह कृत्य अत्यंत संवेदनशील,अनुचित एवं आपराधिक प्रकृति का है। कुलसचिव ने यह भी बताया कि पूर्व में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं,जिससे यह प्रतीत होता है कि किसी संगठित तरीके से कुलपति की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस अज्ञात व्यक्ति या गिरोह की पहचान कर उसके खिलाफ कड़ी,निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल विश्वविद्यालय की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं,बल्कि शिक्षा जगत में अनावश्यक भ्रम और अविश्वास भी पैदा करती हैं। तहरीर मिलने के बाद श्रीनगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत साइबर सेल को जांच के लिए भेज दिया है। साइबर विशेषज्ञ अब मैसेज भेजने वाले नंबर,तकनीकी लोकेशन,उपयोग किए गए प्रोफाइल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहे हैं। अपराधी की पहचान संभवतः डिजिटल ट्रैकिंग से हो सकती है,व्हाट्सऐप चैट पैटर्न और फोटो अपलोड की टाइमलाइन की भी जांच होगी,साइबर अपराध की धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय के शिक्षकों,अधिकारियों और विद्यार्थियों में इस तरह की गतिविधि को लेकर गहरा रोष है। सभी का मानना है कि किसी भी प्रतिष्ठित संस्था के प्रमुख की छवि धूमिल करने की कोशिश न सिर्फ अनैतिक है,बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी का दुरुपयोग आज बड़ी चुनौती बन चुका है। कुलपति की फोटो लगाकर भेजे गए भ्रामक संदेश न केवल आपराधिक कृत्य हैं,बल्कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास भी हैं। साइबर सेल की जांच का परिणाम आने वाले दिनों में इस मामले की वास्तविकता को उजागर करेगा।