गंगा दर्शन-उफल्ड़ा मार्ग के डामरीकरण-सुधारीकरण की मांग तेज विधायक पौड़ी को सौंपा गया ज्ञापन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी शहर को कीर्तिनगर,टिहरी,ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख स्थलों से जोड़ने वाला गंगा दर्शन से उफल्ड़ा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। पौड़ी शहर को कीर्तिनगर,टिहरी,ऋषिकेश और देहरादून जैसे प्रमुख स्थलों से जोड़ने वाला गंगा दर्शन से उफल्ड़ा की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति के चलते स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। लंबे समय से जर्जर और खस्ताहाल पड़े इस मार्ग के डामरीकरण एवं सुधारीकरण की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि यह मार्ग न केवल यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है,बल्कि यह वैकल्पिक संपर्क मार्ग के रूप में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है। यदि इस सड़क का शीघ्र डामरीकरण किया जाता है,तो पौड़ी से कीर्तिनगर,टिहरी,ऋषिकेश और देहरादून आने-जाने वाले हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा,साथ ही यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। इसी जनभावना को लेकर भारतीय जनता पार्टी के जिला महामंत्री गणेश भट्ट ने पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी को ज्ञापन सौंपते हुए इस मार्ग की दुर्दशा से अवगत कराया। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि सड़क की वर्तमान स्थिति अत्यंत जिर्ण-शीर्ण है,जिससे न केवल आवागमन बाधित हो रहा है बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है। ज्ञापन के माध्यम से विधायक से आग्रह किया गया कि क्षेत्रवासियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए गंगा दर्शन-उफल्ड़ा मार्ग का शीघ्र डामरीकरण एवं व्यापक सुधारीकरण कराया जाए,ताकि जनता को सुरक्षित,सुगम और सुलभ यातायात सुविधा मिल सके। इस मौके पर गणेश भट्ट ने कहा कि सड़कें किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होती हैं और यदि आधारभूत सुविधाएं मजबूत होंगी,तभी क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विधायक इस जनहित से जुड़े विषय पर त्वरित संज्ञान लेते हुए सकारात्मक कार्रवाई करेंगे। स्थानीय लोगों ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि वर्षों से उपेक्षित इस मार्ग की सुध लेना अब बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई तो जनआंदोलन भी किया जा सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि जनभावनाओं से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं।

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