
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व तकनीकी अधिकारी तथा स्पर्श गंगा अभियान के संस्थापक सदस्यों में से एक स्व.मोहन नैथानी को उनके अमूल्य योगदान के लिए स्पर्श गंगा महोत्सव-2025 के अवसर पर मरणोपरांत स्पर्श गंगा अभियान सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) प्रकोष्ठ गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा प्रारंभ किए गए गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के स्वच्छता एवं जन-जागरूकता अभियान के तहत प्रदान किया गया। स्व.मोहन नैथानी का निधन कोरोना महामारी के दौरान हुआ था,किंतु गंगा संरक्षण,पर्यावरण चेतना और विश्वविद्यालय के आउटरीच कार्यक्रमों में उनका योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। उन्होंने स्पर्श गंगा अभियान के अंतर्गत अनेक नवाचारी प्रयोगों और जमीनी कार्यों के माध्यम से अभियान को नई दिशा प्रदान की। वे गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रथम सोशल मीडिया चैंपियन प्रभारी भी रहे और विश्वविद्यालय के विभिन्न आउटरीच कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार,दस्तावेजीकरण तथा जनसंवाद को सशक्त बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इतिहास एवं पुरातत्व विभाग में थ्री-डी प्रोडक्शन और तकनीकी दस्तावेजीकरण में उनकी विशेष दक्षता रही,जिससे शैक्षणिक गतिविधियों को आधुनिक स्वरूप मिला। स्पर्श गंगा अभियान के संस्थापक समन्वयक एवं उत्तराखंड स्पर्श गंगा बोर्ड के पूर्व ओएसडी प्रो.बड़ोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत 17 दिसंबर को स्पर्श गंगा दिवस के अवसर पर यह सम्मान थानों क्षेत्र के लेखक गांव में आयोजित समारोह में स्व.मोहन नैथानी की पुत्री तनीषा नैथानी को प्रदान किया गया। सम्मान समारोह में पद्मभूषण पर्यावरणविद् डॉ.अनिल जोशी,पद्मश्री कल्याण सिंह रावत (मैती आंदोलन),स्पर्श गंगा अभियान की राष्ट्रीय संयोजिका एवं फिल्म निर्मात्री डॉ.अरुषि निशंक,भारतीय वन्यजीव संस्थान,देहरादून की अधिष्ठाता डॉ.रुचि बड़ोला सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर देशभर से आए 500 से अधिक स्पर्श गंगा स्वयंसेवक,राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राएं,शिक्षक, अधिकारी,बाल प्रहरी,समाजसेवी एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने स्व.मोहन नैथानी के कार्यों को स्मरण करते हुए उन्हें गंगा सेवा का मौन साधक बताया और उनके योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।