गढ़वाल विश्वविद्यालय में डिजाइन चिंतन,समालोचनात्मक सोच एवं नवाचार संरचना पर कार्यशाला आयोजित

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की संस्थान नवाचार परिषद द्वारा प्रौद्योगिकी पूर्व-इन्क्यूबेशन प्रकोष्ठ के सहयोग से डिजाइन चिंतन,समालोचनात्मक सोच एवं नवाचार संरचना विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की संस्थान नवाचार परिषद द्वारा प्रौद्योगिकी पूर्व-इन्क्यूबेशन प्रकोष्ठ के सहयोग से डिजाइन चिंतन,समालोचनात्मक सोच एवं नवाचार संरचना विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के वनस्पति एवं सूक्ष्म जैविकी विभाग में आयोजित हुई। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों में नवाचार आधारित अनुसंधान,उद्यमशीलता की समझ तथा समाजोपयोगी समाधान विकसित करने की क्षमता को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम का संचालन शोध छात्रा गौतमी भट्ट द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.रविंदर कुमार गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने भारत सरकार की प्रमुख नवाचार एवं उद्यमिता योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने युक्ति नवाचार पोर्टल,कपिला योजना बौद्धिक संपदा संरक्षण योजना तथा स्टार्टअप इंडिया बीज निधि योजना की जानकारी देते हुए बताया कि किस प्रकार छात्र एवं शोधकर्ता अपने नवाचार विचारों को व्यावहारिक रूप देकर सरकारी सहयोग प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने अनुसंधान को प्रयोगशालाओं से निकालकर समाज और उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। दूसरे वक्ता डॉ.राम कुमार साहू पूर्व अध्यक्ष संस्थान नवाचार परिषद गढ़वाल विश्वविद्यालय ने युक्ति नवाचार चुनौती की प्रक्रिया,पंजीकरण विधि तथा उद्योग-उन्मुख नवाचारों के लिए उपलब्ध सरकारी सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने छात्रों को नवाचार को रोजगार सृजन का माध्यम बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कई प्रतिभागियों ने युक्ति नवाचार प्रतियोगिता के लिए अपने नवाचार विचार प्रस्तुत किए,जिनकी विशेषज्ञों द्वारा सराहना की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.रवि कांत एवं प्रो.एन.गोविंदन ने संयुक्त रूप से की। वहीं कार्यक्रम के अंत में डॉ.भास्करन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यशाला नवाचार पारिस्थिति की तंत्र के सुदृढ़ीकरण,बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता तथा उद्यमशील सोच के विकास की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी और प्रभावशाली सिद्ध हुई।

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