गढ़वाल विश्वविद्यालय में आईसीएसएसआर कार्यशाला का चौथा दिन ज्ञान,अनुशासन और नवाचार से हुआ परिपूर्ण

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद प्रायोजित शोध पद्धति

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग एवं भौतिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 10 दिवसीय भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद प्रायोजित शोध पद्धति कार्यशाला का चौथा दिन ज्ञानवर्धक,अनुशासित एवं अत्यंत प्रभावशाली गतिविधियों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दिन विभिन्न सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध की बारीकियों,नैतिकता और व्यावहारिक पक्षों का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रो.संजय कुमार सिन्हा ने शोध प्रस्ताव एवं सारांश निर्माण विषय पर अत्यंत विस्तारपूर्वक व्याख्यान दिया। उन्होंने एक सशक्त शोध प्रस्ताव तैयार करने की मूलभूत संरचना को स्पष्ट करते हुए शोध समस्या की सटीक पहचान,उद्देश्यों की स्पष्ट अभिव्यक्ति,उपयुक्त कार्यप्रणाली का चयन तथा अपेक्षित परिणामों के संतुलित निर्धारण पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों को अपने विचारों को संक्षिप्त,सटीक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की कला भी सिखाई। इस सत्र में शोध प्रतिवेदन लेखन के विभिन्न आयामों पर भी गंभीर चर्चा की गई,जिसमें अध्यायों का सुव्यवस्थित क्रम,शैक्षणिक लेखन शैली की मर्यादा तथा शोध कार्य में तार्किक प्रवाह बनाए रखने की विधियों को विस्तार से समझाया गया। द्वितीय सत्र शोध प्रतिवेदन एवं शोध लेख पर आधारित एक व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र रहा,जिसमें प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष अभ्यास के माध्यम से शोध प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक दक्षता भी प्रदान की। तृतीय एवं चतुर्थ सत्र में प्रो.अमित कुमार जायसवाल ने शोध नैतिकता एवं सत्यनिष्ठा,साहित्यिक चोरी तथा बौद्धिक संपदा अधिकार अधिनियम: भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में चुनौतियां एवं विचार विषय पर गहन व्याख्यान एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने शोध में नैतिक मूल्यों की अनिवार्यता,मौलिकता की रक्षा तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व को विस्तार से रेखांकित करते हुए वर्तमान शैक्षणिक परिदृश्य में आने वाली चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। दिनभर के चारों सत्रों के उपरांत प्रतिभागियों ने प्रस्तुति स्लाइड्स के माध्यम से अपनी-अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की,जिसमें पूरे दिन की गतिविधियों का सारगर्भित विवरण दिया गया। इस प्रक्रिया ने प्रतिभागियों के आत्मविश्वास और प्रस्तुतीकरण कौशल को भी नई ऊंचाइयों तक पहुचाया। कार्यक्रम के समापन सत्र में आगामी दिवस के फील्ड भ्रमण को लेकर विस्तृत चर्चा की गई,जिसमें सभी प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अपने विचार साझा किए और कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया। कार्यशाला के सफल संचालन में प्रतिभागियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही,जिसमें शोभित त्रिवेदी तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रतिभागी मुस्कान ने विशेष योगदान दिया। इस संपूर्ण आयोजन का कुशल निर्देशन डॉ.देवेंद्र सिंह एवं सह-निदेशन डॉ.आलोक सागर गौतम द्वारा किया गया,जिनके मार्गदर्शन में यह कार्यशाला शोध के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है। यह कार्यशाला न केवल शोधार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हो रही है,बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार,नैतिक और सक्षम शोधकर्ता के रूप में विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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