गुरुकुल स्कूल श्रीनगर में साक्षरता दिवस पर विधिक जागरूकता शिविर में एक बच्चा-एक पुस्तक अभियान के संदेश से गूंजा परिसर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितम्बर 2025 के अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के दिशा-निर्देशों पर गुरुकुल स्कूल,भक्ति

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितम्बर 2025 के अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के दिशा-निर्देशों पर गुरुकुल स्कूल,भक्ति याना श्रीनगर में एक भव्य विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सिविल जज जूनियर डिवीजन एवं अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति श्रीनगर कु.अलका ने की। शिविर के दौरान एक बच्चा-एक किताब अभियान को आगे बढ़ाते हुए कुमारी अलका ने बच्चों से पुस्तकों का वितरण कराया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और न्याय दोनों ही हमारे मौलिक अधिकारों के मूल स्तंभ हैं। हर बच्चे के पास कम से कम एक पुस्तक होना अत्यंत आवश्यक है,क्योंकि पुस्तक केवल ज्ञान का साधन ही नहीं बल्कि संस्कार,सोचने की शक्ति और सपनों को साकार करने का मार्गदर्शन भी देती है। अपने संबोधन में सिविल जज जूनियर डिवीजन कु.अलका ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमें शिक्षा की महत्ता का स्मरण कराता है। शिक्षा के बिना न तो न्याय संभव है और न ही जागरूक समाज का निर्माण। इसलिए हमें सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा शिक्षा और पुस्तकों से वंचित न रह जाए। कु.अलका ने यह भी स्पष्ट किया कि साक्षर समाज ही मजबूत लोकतंत्र और न्यायपूर्ण व्यवस्था की नींव रख सकता है। उन्होंने बच्चों और उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे शिक्षा के प्रसार और विधिक जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने में अपना योगदान दें। इस अवसर पर गुरुकुल स्कूल की प्रधानाचार्या शालिनी चंदोला ने विद्यालय परिवार की ओर से साक्षरता और विधिक जागरूकता कार्यक्रम को सराहनीय पहल बताया। साथ ही पीएलवी सदस्य पूनम हटवाल,रोशनी देवी,प्रियंका रॉय एवं मानव बिष्ट की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया। शिविर में जब छोटे-छोटे बच्चों ने अपने हाथों में नई पुस्तकें थामीं तो उनके चेहरे पर झलकती मुस्कान ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा का बीज बचपन में बोया जाए तो वह भविष्य में फलदार वृक्ष बनकर समाज को दिशा देता है। बच्चों के उत्साह और चमकती आंखों ने कार्यक्रम को केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि एक भावनात्मक और प्रेरणादायी क्षण बना दिया। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम एक बच्चा-एक पुस्तक रखी गई है,जो शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने और हर बच्चे तक ज्ञान का दीप जलाने का प्रेरणादायी संदेश देती है।

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