
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षक दिवस पखवाड़े के अंतर्गत वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान श्रीनगर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो.डॉ.आशुतोष सयाना ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन संकाय सदस्यों को स्वामी विवेकानंद बेस्ट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया। सम्मानित शिक्षकों में डर्मेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ.दीपक डिमरी,माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ.विनिता रावत तथा एनाटॉमी विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ.अनिल द्विवेदी शामिल रहे। इन सभी ने बीते वर्ष में न केवल शैक्षणिक कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और छात्रों के मार्गदर्शन में भी सराहनीय कार्य किया। कॉलेज प्रेक्षागृह में आयोजित इस भव्य समारोह में एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों को समर्पित कविताओं,भाषणों,कबीर के दोहों और नाट्य-प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। मंच पर छात्रों ने अपनी रचनात्मकता और उत्साह से शिक्षक-शिष्य परंपरा को एक नई ऊंचाई दी। सम्मान समारोह के दौरान प्राचार्य डॉ.आशुतोष सयाना ने कहा शिक्षक केवल ज्ञान ही नहीं देते,बल्कि वे छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं। उनका प्रभाव जीवनभर छात्रों के व्यक्तित्व और सोच पर दिखाई देता है। उन्होंने आगे कहा कि मेडिकल शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है,बल्कि यह सीधे मरीजों के जीवन से जुड़ी है। अच्छे शिक्षक ही अच्छे चिकित्सक और संवेदनशील नागरिक तैयार करते हैं। डॉ.सयाना ने यह भी घोषणा की कि फर्स्ट प्रो,सेकंड प्रो और थर्ड प्रोफेशनल कोर्स में उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन संकाय सदस्यों को हर साल सम्मानित किया जाएगा। इनका चयन छात्रों की फीडबैक और शैक्षणिक योगदान के आधार पर होगा। उन्होंने कहा कि फैकल्टी और छात्रों के बीच बेहतर समन्वय से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि मरीजों को भी लाभ मिलेगा। इस अवसर पर बेस अस्पताल श्रीकोट के एमएस डॉ.राकेश रावत सहित डॉ.दीपा हटवाल,डॉ.अशोक शर्मा,डॉ.धनंजय डोभाल,डॉ.सुरेंद्र सिंह,डॉ.अनिल तथा डॉ.जितेंद्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.सुरेंद्र सिंह नेगी ने किया। वहीं एनएमओ टीम से डॉ.आशुतोष मिश्रा,यश जिंदल,जतिन फुलेरा,ओम नौटियाल,सिमरन मिश्रा और कनिष्का भट्ट ने मंच का कुशल संचालन कर कार्यक्रम को गरिमामयी बनाया। समारोह का समापन तालियों की गड़गड़ाहट और प्रेरणादायी पंक्तियों के साथ हुआ जिसने पूरे वातावरण को गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा से सराबोर कर दिया।