हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
देहरादून/श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना गोल्डन कार्ड के अंतर्गत कैशलेस उपचार व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। अब योजना के तहत उपचारित प्रत्येक लाभार्थी से अस्पतालों को डिस्चार्ज के समय अनिवार्य रूप से फीडबैक फार्म भरवाना होगा। इस फार्म के बिना अस्पतालों के चिकित्सा दावों पर भुगतान नहीं किया जाएगा। यह निर्देश स्टेट हेल्थ अथॉरिटी उत्तराखंड द्वारा प्रदेश के सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को जारी कर दिए गए हैं। प्राधिकरण के चेयरमैन अरविंद सिंह ह्यांकी ने जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत पहले से ही उपचारित मरीजों से डिस्चार्ज के समय फीडबैक फार्म भरवाया जाता है। अब यही व्यवस्था राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (एसजीएचएस) के अंतर्गत भी लागू कर दी गई है। फीडबैक फार्म में निम्नलिखित बिंदुओं का स्पष्ट उल्लेख होगा उपचार की अवधि की गई जांचों का विवरण प्रयुक्त दवाइया,अपनाई गई उपचार प्रक्रिया कुल उपचार व्यय कैशलेस सुविधा की पुष्टि उपचार की गुणवत्ता पर लाभार्थी की राय अस्पतालों को यह फार्म लाभार्थी के हस्ताक्षर सहित चिकित्सा दावे के साथ अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। यदि फीडबैक फार्म संलग्न नहीं पाया गया,तो संबंधित दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। रैण्डम सत्यापन भी होगा प्राधिकरण की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि दावों के परीक्षण के दौरान फीडबैक फार्म की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही उपचारित लाभार्थियों को रैण्डम आधार पर फोन कर फार्म में दर्ज जानकारी की पुष्टि भी की जाएगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि कई लाभार्थियों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके उपचार में कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई गई और कितना खर्च दर्शाया गया है। इस संबंध में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लाभार्थी को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके उपचार में क्या प्रक्रिया अपनाई गई और कितना व्यय हुआ। फीडबैक व्यवस्था से न केवल मरीजों का विश्वास मजबूत होगा,बल्कि अस्पतालों की कार्यप्रणाली में भी गुणवत्ता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित होगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी और जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत प्रदेश के राजकीय एवं स्वायत्तशासी कार्मिकों तथा पेंशनरों को अंशदान के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों में असीमित कैशलेस उपचार की सुविधा प्रदान की जाती है। प्रदेश में लगभग 5.16 लाख एसजीएचएस कार्ड धारक हैं। अब तक 1.73 लाख मरीजों ने अस्पतालों में भर्ती होकर योजना का लाभ उठाया है। योजना के आरंभ से अब तक 641 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। ओपीडी के अंतर्गत 1.83 लाख दावों के सापेक्ष लगभग 300 करोड़ रुपये व्यय हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता,गुणवत्ता नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। गोल्डन कार्ड योजना के तहत अब लाभार्थी केवल उपचार का पात्र नहीं रहेगा,बल्कि पूरी प्रक्रिया का जागरूक भागीदार भी बनेगा। यह व्यवस्था स्वास्थ्य तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।