हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद की पट्टी बच्छणस्यूं के अंतर्गत ग्राम सभा मरगांव में इस बार दीपावली की रौनक कुछ अलग ही नजर आ रही है। जहां एक ओर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम नागराज देवता के भव्य भंडारे के रूप में देखने को मिला,वहीं अब ग्रामवासी एक नई परंपरा की ओर कदम बढ़ा रहे हैं आत्मनिर्भर मरगांव की रामलीला। गांव के नवयुवक दल ने इस आयोजन की बागडोर अपने हाथों में लेकर दिखा दिया कि अगर इच्छाशक्ति और एकजुटता हो,तो कोई कार्य असंभव नहीं। डॉ.प्रकाश चंद चमोली,आचार्य जय कृष्णा,अनंत राम सोनी,पंत और नितिन जैसे मार्गदर्शकों के सहयोग से युवाओं ने भंडारे का आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न किया। वहीं हिमांशु ने अपनी ढोलक की थाप से पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का रंग भर दिया। इस अवसर पर ग्राम प्रधान,क्षेत्र पंचायत सदस्य,जिला स्तरीय जनप्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लेकर आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। मातृशक्ति ने भी बढ़ चढ़कर सहयोग किया। रसोई से लेकर सजावट तक,हर कार्य में उनका समर्पण झलकता रहा। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि इस बार का आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं,बल्कि ग्राम एकता और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण है। किसी को बाहर से बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ी,हर कार्य गांव के अपने लोगों ने किया-यही है एक भारत,आत्मनिर्भर भारत की सच्ची झलक। अब कल से मरगांव में श्रीरामलीला महोत्सव का शुभारंभ होगा,जो पूर्णतः गांव के ही कलाकारों द्वारा मंचित की जाएगी। आयोजन समिति ने संकल्प लिया है कि रामलीला भी उसी आत्मनिर्भर भावना के साथ आयोजित की जाएगी,जैसी भावना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक देश,एक दिशा,एक संकल्प के संदेश में निहित है। मरगांव की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है-जहां श्रद्धा,संस्कृति और स्वावलंबन एक साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। जब गांव के युवा और मातृशक्ति एकजुट होकर कार्य करते हैं,तो न केवल परंपराएं जीवित रहती हैं,बल्कि विकास का दीप भी जगमगा उठता है। वास्तव में मरगांव ने दिखा दिया जहां एकता है,वहीं समृद्धि है,जहां आत्मनिर्भरता है,वहीं असली आजादी है।