घोस्ट विलेज से जगी उम्मीद की लौ

गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का निर्जन गांव पातली दौरा,पलायन रोकने और गांव फिर आबाद करने का लिया संकल्प हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल लोकसभा सांसद,भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय मीडिया

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गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का निर्जन गांव पातली दौरा,पलायन रोकने और गांव फिर आबाद करने का लिया संकल्प

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। गढ़वाल लोकसभा सांसद,भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एवं राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने शुक्रवार को पौड़ी जनपद के कोट विकासखंड स्थित निर्जन गांव (घोस्ट विलेज) पातली का दौरा कर पलायन की पीड़ा,गांवों के खाली होने की भयावह सच्चाई और उन्हें फिर से आबाद करने की संभावनाओं पर प्रवासी ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। यह दौरा केवल निरीक्षण नहीं,बल्कि पलायन के खिलाफ जन-जागरूकता और भावनात्मक पुनर्जागरण का प्रयास बनकर सामने आया। पातली गांव में देहरादून सहित विभिन्न महानगरों से प्रवासी ग्रामीण अपने पैतृक गांव पहुंचे थे। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग इस अवसर पर एकत्र हुए। वर्षों से सुनसान पड़े अपने गांव को देखकर प्रवासी ग्रामीण भावुक नजर आए। आंखों में पीड़ा,चिंता और गांव को बचाने की तड़प साफ झलक रही थी। इस मौके पर सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि अपने ही गांव को घोस्ट विलेज बनते देखना किसी के लिए भी बेहद पीड़ादायक अनुभव है। उन्होंने इसे पहाड़ के सामाजिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक भविष्य के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने ग्रामीणों से आह्वान किया कि गांव को फिर से जीवंत करने की शुरुआत हमें खुद से करनी होगी। अनिल बलूनी ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा हर परिवार को कम से कम एक लोकपर्व,परिवार के किसी एक सदस्य का जन्मदिन और एक विवाह कार्यक्रम अपने पैतृक गांव में जरूर मनाना चाहिए। इससे हमारे बच्चे,हमारा परिवार,हमारी आने वाली पीढ़ी अपने गांव,अपनी संस्कृति और अपने पुरखों से जुड़ेगी। यही जुड़ाव गांवों को फिर से गुलजार करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज और वेडिंग इन उत्तराखंड जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश का नेतृत्व पहाड़ों को आबाद करने का संकल्प ले चुका है,तो हम अपने निजी आयोजनों के लिए अपने गांव क्यों नहीं लौट सकते। सांसद बलूनी ने कहा कि उन्होंने स्वयं इगास और अपना वोट,अपने गांव जैसे अभियानों की शुरुआत इसी उद्देश्य से की थी,ताकि जमीनी स्तर पर बदलाव लाया जा सके,जिसका सकारात्मक असर अब दिखने लगा है। उन्होंने पलायन के कारण पहाड़ के घटते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा पहाड़ के गांवों को बचाना सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं,बल्कि यह उत्तराखंड और देश की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। हमारा सीमांत प्रदेश चीन से सटा है और यहां के ग्रामीण हमारे फुट सोल्जर की तरह हैं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विधानसभा क्षेत्रों की संख्या लगातार घट रही है-पौड़ी में 8 से 6,चमोली में 4 से संभावित 2-जो पहाड़ की राजनीतिक आवाज कमजोर होने का संकेत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पहाड़ की आवाज को मजबूत रखने के लिए पहाड़ को आबाद रखना अनिवार्य है। इस अवसर पर लोकसभा प्रभारी पुष्कर काला,पौड़ी विधायक राजकुमार पोरी,जिला पंचायत अध्यक्ष रचना बुटोला,पूर्व विधायक मुकेश कोहली,प्रदेश प्रवक्ता विपिन कैंथोला,जिला अध्यक्ष पौड़ी कमल किशोर रावत,जिला महामंत्री गणेश भट्ट,भाजपा महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रमिला भंडारी,सोशल मीडिया प्रभारी सीमा भंडारी,ओबीसी मोर्चा जिला अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी,ग्राम प्रधान बबली देवी सहित अनेक पदाधिकारी,कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन हिम्मत सिंह नेगी ने किया। यह दौरा न केवल पातली गांव के लिए,बल्कि पूरे गढ़वाल में निर्जन होते गांवों के पुनर्जीवन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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