नागरिक पहल से सुदृढ़ हुई सड़क सुरक्षा,लेकिन दीर्घकालिक समाधान अब भी जरूरी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। सड़क परिवहन किसी भी देश की जीवनरेखा होता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक पहुंच और आम नागरिकों के लिए सहज उपलब्धता है। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सड़क परिवहन न केवल आवागमन का साधन है,बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों,आपातकालीन सेवाओं,पर्यटन और तीर्थयात्रा का आधार भी है। किंतु विगत कुछ वर्षों से चारधाम यात्रा मार्गों तथा राज्य के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर बार-बार सामने आ रहे भूस्खलन,सड़क अवरोध,पहाड़ी ढलानों के धंसने और जन-सुरक्षा से जुड़े खतरे अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गए हैं,बल्कि यह एक स्थायी और गंभीर चुनौती का रूप ले चुके हैं। मानसून के दौरान और उसके बाद लगातार घटित घटनाएं यह संकेत देती हैं कि पहाड़ी भू-भाग में सड़क निर्माण,बढ़ता यातायात दबाव,जलवायु परिवर्तन और भू-वैज्ञानिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाना आज उत्तराखंड ही नहीं,बल्कि पूरे देश के लिए एक जटिल विषय बन चुका है। चारधाम यात्रा मार्गों पर बार-बार मार्ग अवरुद्ध होने,यात्राएं रोके जाने और आवश्यक सेवाओं के ठप होने से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ लाखों श्रद्धालुओं को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का उद्देश्य दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देना,तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराना तथा स्थानीय लोगों के लिए आवागमन और आजीविका के अवसर सुदृढ़ करना है। केंद्र सरकार द्वारा इस दिशा में किए गए प्रयास निस्संदेह महत्वपूर्ण हैं,किंतु यह भी सत्य है कि अवैज्ञानिक कटिंग,ढलानों की अस्थिरता और अपर्याप्त सुरक्षा उपायों के कारण कई स्थानों पर जान-माल की हानि और लंबा यातायात अवरोध देखने को मिला है,जिसकी गूंज समय-समय पर राष्ट्रीय मीडिया में भी सुनाई दी है। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रो.एम.एम.सेमवाल विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान विभाग हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की पहल पर उत्तराखंड के नागरिक समाज,शिक्षाविदों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न पेशेवर वर्गों से जुड़े लोगों ने संगठित रूप से अपनी चिंता और सुझाव सरकार के समक्ष रखे। अगस्त 2023 में चारधाम यात्रा मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रहे भूस्खलन को लेकर एक सामूहिक ज्ञापन प्रस्तुत किया गया,जिस पर 146 नागरिकों के हस्ताक्षर थे। इस ज्ञापन में केवल समस्या नहीं,बल्कि उसके वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान भी सुझाए गए-भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान,स्टील वायर मेश एवं सुरक्षा गार्ड की स्थापना,ढीले पत्थरों और बोल्डरों को हटाना,रिटेनिंग वॉल का निर्माण,सुरंगों के विकल्प पर विचार,वृक्षारोपण,आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं और त्वरित राहत-बचाव तंत्र को मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव शामिल थे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस विषय पर दिखाई गई संवेदनशीलता उल्लेखनीय रही। मंत्रालय के निर्देश पर चारधाम मार्गों और अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई स्थानों पर स्टील मेश,सुरक्षा संरचनाएं,ढलानों की सफाई और सड़क चौड़ीकरण के साथ सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ किया गया। इन कार्यों से न केवल स्थानीय नागरिकों को राहत मिली,बल्कि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है। यह संतोष का विषय है कि इन उपायों पर कार्य अभी भी सतत रूप से जारी है। इस संपूर्ण नागरिक पहल और पत्राचार को सकारात्मक रूप से लेते हुए गढ़वाल सांसद एवं लोकसभा सदस्य अनिल बलूनी ने इसे संबंधित मंत्रालयों के समक्ष गंभीरता से उठाया,जिससे समाधान की प्रक्रिया को गति मिली। हालिया समाचार रिपोर्टें यह दर्शाती हैं कि अत्यधिक वर्षा और बदलते मौसम पैटर्न के कारण नए भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्र उभर रहे हैं। कई बार चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा,कहीं मार्ग अवरुद्ध हुए और कहीं वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि समस्या का समाधान एकमुश्त कार्रवाई से संभव नहीं,बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक,वैज्ञानिक और सतत रणनीति अपनानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। नए सुझावों में यह भी शामिल है कि ऑल वेदर रोड परियोजना के डंपिंग ग्राउंड को सुव्यवस्थित कर बगीचों, पार्कों या उपयोगी संसाधनों के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही ऋषिकेश-देवप्रयाग,गंगोत्री और यमुनोत्री राजमार्गों पर आधुनिक मेडिकल सुविधाओं की स्थापना सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है। इस पूरे घटनाक्रम से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आता है कि जब नागरिक समाज जागरूक होकर तथ्यों और व्यावहारिक सुझावों के साथ सरकार का ध्यान आकृष्ट करता है,तो उस पर विचार ही नहीं,बल्कि अमल भी होता है। यह प्रक्रिया भले ही समय ले,लेकिन संगठित,शांतिपूर्ण और उद्देश्यपूर्ण प्रयास परिणाम देते हैं। यह पहल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं,बल्कि चारधाम परियोजना और उत्तराखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों को अधिक सुरक्षित,टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास है। इसका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण नहीं,बल्कि जीवन की सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए संतुलित विकास सुनिश्चित करना है। अंत में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी,गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी,हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर डॉ.योगेंद्र नारायण तथा सभी संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है,जिन्होंने उत्तराखंड की भौगोलिक संवेदनशीलता को समझते हुए नागरिकों की चिंताओं पर सकारात्मक कार्रवाई की। आशा है कि यह सहयोग और संवाद आगे भी जारी रहेगा और चारधाम मार्ग भविष्य में और अधिक सुरक्षित बनेंगे।