चिलोली की धरती ने उगली प्राचीन धरोहर-खुदाई में निकली गणेश प्रतिमा व नागयुक्त शिवलिंग,संरक्षण में जुटा पुरातत्व विभाग

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के विकासखंड कल्जीखाल अंतर्गत किमोली-चिलोली गांव में उस समय उत्साह और कौतूहल का माहौल बन गया,जब एक पुराने जल स्रोत के सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के विकासखंड कल्जीखाल अंतर्गत किमोली-चिलोली गांव में उस समय उत्साह और कौतूहल का माहौल बन गया,जब एक पुराने जल स्रोत के सौंदर्यीकरण कार्य के दौरान खुदाई में प्राचीन मूर्तियां प्रकाश में आईं। यह खोज न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए आस्था का केंद्र बन गई है,बल्कि क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी नई पहचान देने वाली साबित हो रही है। प्राप्त मूर्तियों में भगवान गणेश की एक सुस्पष्ट प्रतिमा तथा नाग से अलंकृत शिवलिंग शामिल है। दोनों ही प्रतिमाएं शिल्पकला की दृष्टि से अत्यंत आकर्षक और प्राचीन प्रतीत हो रही हैं,जो इस क्षेत्र के समृद्ध धार्मिक इतिहास की ओर संकेत करती हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन प्रतिमाओं के मिलने के बाद गांव में श्रद्धा और जिज्ञासा का वातावरण व्याप्त हो गया। ग्राम प्रधान हेमंती देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि गांव में जल स्रोत के सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा था। इसी दौरान खुदाई करते समय ये प्राचीन मूर्तियां प्राप्त हुईं। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल पुरातत्व विभाग को सूचित किया गया,ताकि इन धरोहरों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। सूचना मिलते ही प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई पौड़ी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची और स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच के आधार पर उन्होंने बताया कि दोनों प्रतिमाएं प्राचीन काल की प्रतीत हो रही हैं,जिनका विस्तृत अध्ययन और काल निर्धारण विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने बताया कि मूर्तियों को सुरक्षित संरक्षण हेतु विभाग के सुपुर्द कर लिया गया है। भविष्य में इन्हें पौड़ी स्थित निर्माणाधीन हेरिटेज भवन के संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा,जिससे आमजन,शोधार्थी और पर्यटक इस महत्वपूर्ण धरोहर से रूबरू हो सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की खोजें न केवल क्षेत्र के प्राचीन इतिहास को उजागर करती हैं,बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। साथ ही यह स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में भी सहायक सिद्ध हो सकती हैं। इस मौके पर संरक्षक सहायक पुरातत्व अनिल नेगी,मानचित्रकार प्रेमचंद्र ध्यानी,फोटोग्राफर विनीत गिरी,पंकज सहित कई स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे,जिन्होंने इस ऐतिहासिक खोज को लेकर उत्साह व्यक्त किया। स्थानीय स्तर पर बढ़ी आस्था और उत्सुकता मूर्तियों के मिलने के बाद क्षेत्र में धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास के प्रति जिज्ञासा भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का मानना है कि यह खोज उनके गांव की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है और आने वाले समय में यह स्थान एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।

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