
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल/जखोली। लगातार हो रही भारी बारिश ने जखोली क्षेत्र के बजीरा गांव के लोगों की नींद उड़ा दी है। ममणी-जखोली मोटर मार्ग पर जैमर तौक के समीप गुरुवार रात भारी भूस्खलन होने से मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है। इससे जहां यातायात पूरी तरह ठप हो गया है,वहीं बजीरा गांव के लगभग 50 परिवारों के घर खतरे की जद में आ गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि भूस्खलन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना घट सकती है। ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश करने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रधान विजया देवी पुण्डीर,क्षेत्र पंचायत सदस्य सरोजनी देवी,पूर्व प्रधान दिनेश सिंह चौहान,प्रबंधक भगत सिंह पुण्डीर,केदार सिंह चौहान,मंगल सिंह,पुष्पेन्द्र सिंह राणा और बलवीर सिंह के नेतृत्व में उप जिलाधिकारी जखोली को ज्ञापन सौंपकर तत्काल भू-धंसाव रोकने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी ट्रीटमेंट और रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो दर्जनों परिवार बेघर हो जाएंगे और बड़ी जनहानि से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामवासियों का कहना है कि बारिश के चलते ममणी-जखोली मोटर मार्ग बार-बार बाधित हो रहा है,जिससे क्षेत्र की आवाजाही और आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना भी कठिन हो गया है। ग्रामीणों की पीड़ा और बच्चों की मुश्किलें भूस्खलन के कारण गांव के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। स्कूली बच्चे रोजाना पथरीले रास्तों से होकर जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने की कोशिश करते हैं,वहीं कई अभिभावक अपने बच्चों को खतरे के चलते घर से बाहर नहीं भेज पा रहे। दूसरी ओर बीमार और बुजुर्ग लोगों की स्थिति और भी दयनीय हो गई है। अस्पताल तक पहुंचने का मार्ग अवरुद्ध होने से लोग भारी कठिनाई का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि शासन-प्रशासन यदि समय पर राहत और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं करता तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अपील की है कि तत्काल राहत और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का स्थायी ट्रीटमेंट कर लोगों को सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाए। जखोली का यह संकट केवल एक गांव तक सीमित नहीं है,बल्कि यह पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे भू-धंसाव और जलवायु संकट की गहरी चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़े खतरे सामने आ सकते हैं।