
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर में कभी जहां बदबू,गंदगी और उपेक्षा का आलम था,जहां से गुजरना भी लोगों के लिए असहज अनुभव होता था,आज वही स्थान हरियाली,स्वच्छता और सुकून का प्रतीक बन गया है। श्रीनगर के नर्सरी रोड स्थित पुराने रैन बसेरे के पास विकसित रजत जयंती पार्क इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि इच्छाशक्ति और सही दिशा में प्रयास हों,तो कूड़े का ढेर भी जनसरोकार का सुंदर केंद्र बन सकता है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया के दूरदर्शी निर्देशों और नगर निगम श्रीनगर की सक्रिय कार्यशैली ने इस असंभव से दिखने वाले कार्य को संभव कर दिखाया है। वेस्ट टू वंडर की अवधारणा पर आधारित यह पार्क आज शहरवासियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस परिवर्तन की कहानी तब शुरू हुई,जब जिलाधिकारी ने क्षेत्र का निरीक्षण कर यहां फैली गंदगी को गंभीरता से लिया। वर्षों से जमा कूड़े के ढेर को हटाने और इस स्थान को पुनर्जीवित करने के निर्देश तत्काल दिए गए। नगर निगम ने बिना देर किए विशेष अभियान चलाया और करीब 18 हजार टन कूड़ा हटाकर उसे गिरीगांव स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में स्थानांतरित किया। इसके बाद खाली हुई भूमि को समतल कर सुनियोजित विकास कार्य प्रारंभ किया गया। वेस्ट टू वंडर थीम पर इस स्थान को एक सुंदर,सुव्यवस्थित और जनोपयोगी पार्क रजत जयंती पार्क के रूप में विकसित किया गया,जो अब शहर की नई पहचान बनता जा रहा है। पार्क में बच्चों के लिए आकर्षक झूले और खेल सामग्री,सुबह-शाम टहलने के लिए सुव्यवस्थित पथ,बैठने के लिए आरामदायक बेंच,पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और लगभग 50 से 60 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा विकसित की गई है। हरियाली और स्वच्छ वातावरण ने इस स्थान को और भी जीवंत बना दिया है। आज हालात यह हैं कि जहां पहले लोग इस क्षेत्र से दूरी बनाकर रखते थे,वहीं अब सुबह की सैर से लेकर शाम की सुकूनभरी बैठकों तक यहां लोगों की निरंतर भीड़ उमड़ रही है। बच्चे खेलते नजर आते हैं,बुजुर्ग टहलते हैं और परिवार के लोग प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताते दिखते हैं। महापौर आरती भण्डारी ने कहा कि यह स्थान लंबे समय से कूड़ा निस्तारण की समस्या बना हुआ था,जिससे स्थानीय नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। नगर निगम ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया और सुनियोजित प्रयासों से इसे एक आदर्श सार्वजनिक स्थल में परिवर्तित किया। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य शहर के ऐसे उपेक्षित स्थलों को उपयोगी और सुंदर स्थानों में बदलना है। जिलाधिकारी स्वाति एस.भदौरिया ने इस पहल को केवल सौंदर्यीकरण नहीं,बल्कि जनजीवन में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि वेस्ट टू वंडर की अवधारणा यह संदेश देती है कि अनुपयोगी वस्तुओं का भी रचनात्मक उपयोग कर उन्हें नई पहचान दी जा सकती है। यह प्रयास न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देता है,बल्कि संसाधनों के पुनः उपयोग की दिशा में भी समाज को प्रेरित करता है। उन्होंने उपजिलाधिकारी श्रीनगर के समन्वय और निगरानी की सराहना करते हुए कहा कि इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। रजत जयंती पार्क आज केवल एक पार्क नहीं,बल्कि सोच और संकल्प के परिवर्तन की मिसाल बन चुका है जहां कूड़े का ढेर था,वहां अब उम्मीद,स्वच्छता और खुशियों का बसेरा है।