
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं से अवगत कराने के उद्देश्य से 10 मार्च 2026 को एक प्रेरक एवं संवादात्मक पूर्व छात्र व्याख्यान का आयोजन विभाग के सम्मेलन कक्ष में किया गया। कार्यक्रम का विषय भविष्य के समाधान हेतु युवाओं को प्रेरित करने के लिए बायो-ई-3 चुनौती के लिए डिजाइन को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम में विभाग के दो विशिष्ट पूर्व छात्र एवं प्रतिष्ठित वैज्ञानिक मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इनमें डॉ.अविनाश शर्मा (वैज्ञानिक-ई,BRIC-National Centre for Cell Science,पुणे) तथा डॉ.अरुण जुगरान (वैज्ञानिक-ई,जीबी पंत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन इंनवाइरमैंट श्रीनगर) शामिल रहे। दोनों वैज्ञानिक इसी विभाग के गौरवशाली पूर्व छात्र हैं,जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.सौरभ यादव के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की उन्नति में उसके पूर्व छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। पूर्व छात्र अपने अनुभवों और उपलब्धियों के माध्यम से वर्तमान विद्यार्थियों को प्रेरणा और दिशा प्रदान करते हैं। इसके पश्चात डॉ.संजय पटेल ने अतिथि वक्ताओं का परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके शैक्षणिक तथा वैज्ञानिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों वैज्ञानिकों ने जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया है। अपने व्याख्यान में डॉ.अविनाश शर्मा और डॉ.अरुण जुगरान ने जैव प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों,अनुसंधान के नए अवसरों तथा बायो-ई-3 चुनौती जैसी राष्ट्रीय पहलों के महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान,नवाचार और तकनीकी विकास के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया। साथ ही उन्होंने युवाओं को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अनुसंधान के क्षेत्र में समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। दोनों वैज्ञानिकों ने विभाग द्वारा आयोजित इस पूर्व छात्र व्याख्यान पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों के बीच ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम होते हैं। इससे विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जगत की वास्तविकताओं को समझने और अपने कैरियर के प्रति स्पष्ट दृष्टि विकसित करने में सहायता मिलती है। कार्यक्रम के अंत में विभागाध्यक्ष प्रो.पूजा सकलानी ने अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम संस्थान की शैक्षणिक परंपरा को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व छात्रों के अनुभव और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को नए अवसरों की जानकारी मिलती है और उन्हें अपने भविष्य के लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा भी प्राप्त होती है। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के कार्यक्रमों के नियमित आयोजन पर बल दिया। इस अवसर पर विभाग की शिक्षिका डॉ.बबीता राणा,डॉ.पवन सिंह राणा सहित अन्य शिक्षकगण,स्नातकोत्तर विद्यार्थी और शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मेघा रावत द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ,जिसने उन्हें जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान,नवाचार और भविष्य की संभावनाओं के प्रति नई दृष्टि प्रदान की।