ज्योतिष और भूगोल का अद्भुत संगम-एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय में एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी संपन्न

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग एवं संस्कृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को एक दिवसीय विद्वत संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का विषय था ज्योतिष विधा में भूगोल एवं भौगोलिक परिवेश। इस अवसर पर शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने ज्योतिष और भूगोल के पारस्परिक संबंधों पर गहन चर्चा की। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं विकास परिषद के अध्यक्ष आचार्य भाष्करानन्द अणथ्वाल ने शोध छात्रों को ज्योतिष शास्त्र की आधारभूत अवधारणाओं और उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अवगत कराया। उन्होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति,सौर मण्डल की संरचना,ग्रहों का प्रकाश और गति,ग्रहों की कक्षा,भचक्र तथा अक्षांश-देशांतर का कुंडली निर्माण में महत्व विस्तार से समझाया। इसके साथ ही उन्होंने धूमकेतु,सूर्य के आस-पास के ग्रहों और आर्यभट्ट प्रथम के योगदान का उल्लेख कर विद्यार्थियों को नई दृष्टि प्रदान की। इस अवसर पर प्रो.रामानन्द गैरोला ने ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्योतिष केवल आस्था का विषय नहीं है,बल्कि इसके आधार में गणित और खगोल शास्त्र की ठोस पृष्ठभूमि निहित है। उन्होंने कहा कि अगर इसे तर्क और प्रयोग के आधार पर पढ़ा जाए तो यह आधुनिक विज्ञान से कहीं से भी अलग नहीं है। वहीं डॉ.प्रकाश चमोली ने शोधार्थियों को चेताया कि सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर प्रसारित होने वाला सतही ज्योतिष ज्ञान भ्रामक होता है,इससे बचने की आवश्यकता है। उन्होंने ज्योतिष को राजपोषित विद्या बताते हुए इसके गहन अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पूरे भचक्र के भोगांश और एक राशि के भोगांश की विस्तृत व्याख्या कर विद्यार्थियों को ज्योतिषीय गणनाओं से परिचित कराया। ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी संगोष्ठी-संगोष्ठी में शोध छात्रों और अध्यापकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि भूगोल और ज्योतिष का गहरा संबंध है। पृथ्वी की संरचना,सूर्य-चंद्रमा की गति और ग्रहों की स्थिति सीधे-सीधे भौगोलिक परिवेश से जुड़ी हुई है। इस समन्वय का वैज्ञानिक अध्ययन न केवल भविष्य की दिशा तय करता है बल्कि पारंपरिक ज्ञान को भी आधुनिक दृष्टिकोण देता है। विश्वविद्यालय के लिए नई राह-इस संगोष्ठी ने छात्रों को न केवल पारंपरिक और आधुनिक विज्ञान के संगम से अवगत कराया,बल्कि शोध की नई संभावनाओं का भी द्वार खोला। आयोजन समिति ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के अकादमिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि विद्यार्थी गहन अध्ययन और शोध के माध्यम से प्राचीन ज्ञान को वैज्ञानिक आधार पर पुनर्जीवित कर सकें।

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