ज्योतिष विद्या के आधुनिक स्वरूप पर गंभीर मंथन

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक बौद्धिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

देवप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक बौद्धिक विमर्श से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हिमालय ज्योतिष संरक्षण एवं विकास परिषद के अध्यक्ष आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल के नेतृत्व में देवप्रयाग स्थित श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो.पीवीबी.सुब्रमण्यम से शिष्टाचार भेंट एवं सार्थक संवाद आयोजित हुआ। इस अवसर पर ज्योतिष शास्त्र के आधुनिक स्वरूप,शैक्षणिक विस्तार और शोध संभावनाओं को लेकर गहन चर्चा की गई। वार्ता के दौरान ज्योतिष विद्या के तीन प्रमुख स्कंध-गणित,होरा एवं संहिता के समकालीन संदर्भ में उपयोग,वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ उनके प्रस्तुतीकरण तथा अकादमिक शोध की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल ने चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि पारंपरिक ज्योतिष ज्ञान को केवल कर्मकांड तक सीमित न रखते हुए आधुनिक अकादमिक ढांचे,शोध पद्धतियों और समाजोपयोगी दृष्टि से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि यह ज्ञान नई पीढ़ी के लिए अधिक प्रासंगिक और उपयोगी बन सके। भेंट के दौरान गढ़वाली लोकभाषा को ज्योतिष विद्या के साथ नवाचार के रूप में समन्वित करने की संभावनाओं पर भी गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने माना कि लोकभाषा के माध्यम से ज्योतिष जैसे शास्त्रीय विषय को सामान्य जनमानस तक सरल,प्रभावी और प्रामाणिक रूप में पहुँचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य को लेकर एक विशेष संगोष्ठी के आयोजन की रूपरेखा पर भी सहमति बनी,जिसमें स्नातकोत्तर (पीजी) स्तर के छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। यह संगोष्ठी युवा शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत ज्योतिष के आधुनिक आयामों को समझने,उस पर शोध करने तथा नवाचारी दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करेगी। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निदेशक प्रो.पी.वी.बी.सुब्रमण्यम ने आचार्य भास्करानंद अणथ्वाल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा की गहराई तभी व्यापक समाज तक पहुंचेगी,जब उसे आधुनिक संदर्भों,वैज्ञानिक दृष्टि और स्थानीय भाषाओं से जोड़ा जाएगा। यह शिष्टाचार भेंट देवप्रयाग के शैक्षणिक,सांस्कृतिक और बौद्धिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है,जो आने वाले समय में ज्योतिष विद्या के अध्ययन,संरक्षण,शोध और जनसंपर्क को नई दिशा प्रदान करेगी।

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