टीचर्स कॉलोनी में दरारों से बिखर रहे हैं सपने,आपदा प्रवाहितों ने उठाई पुनर्वास की मांग

हिमालय टाइम्सगबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। श्रीकोट से श्रीनगर के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग बद्रीनाथ रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदिर (घसिया महादेव) के समीप स्थित टीचर्स कॉलोनी आज आपदा की जद में आकर दर्दनाक हालातों

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गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। श्रीकोट से श्रीनगर के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग बद्रीनाथ रोड पर पंचमुखी हनुमान मंदिर (घसिया महादेव) के समीप स्थित टीचर्स कॉलोनी आज आपदा की जद में आकर दर्दनाक हालातों से गुजर रही है। यहां रहने वाले परिवारों के सपनों के आशियाने दरारों से बिखर रहे हैं। घरों की दीवारें चौड़ी दरारों में बदल चुकी हैं,छतों से पानी टपक रहा है और नींव खिसकने से कभी भी ढह जाने का खतरा बना हुआ है। महिलाएं-बच्चे दहशत में दिन काट रहे हैं और हर बारिश की बूंद उनके लिए तबाही का पैगाम लेकर आती है। प्रभावित परिवारों ने अपने दर्द को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पहले रेलवे महाप्रबंधक को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजा। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी पौड़ी,उप जिलाधिकारी/नगर आयुक्त नुपुर बर्मा और नगर महापौर आरती भण्डारी को ज्ञापन सौंपकर पुनर्वास की मांग उठाई। मौत का साया मंडराता है हर वक्त-गृहिणियों का कहना है कि अब रसोई में चूल्हा-चौका करना भी जोखिम उठाने जैसा हो गया है। बच्चों के पढ़ाई करते समय माता-पिता की धड़कनें तेज हो जाती हैं कि कहीं अचानक दीवार न गिर पड़े। पीड़ितों का कहना है हम मजबूरी में उन घरों में रह रहे हैं,जहां हर पल मौत का साया मंडरा रहा है। हमारे सपनों के घर आज खंडहर बन गए हैं। आपदा प्रभावित सुधा देवी कंडारी ने अपने दर्द को शब्दों में बयां करते हुए कहा इंसान अपनी पूरी जिंदगी की कमाई एक घर बनाने में लगा देता है। सोचिए उस पर क्या गुजरती होगी जब उसका बनाया हुआ आशियाना पल भर में ढह जाता है। इस बार की आपदा में कितने ही लोगों ने अपने बने-बनाए घर खो दिए। सरकार हमें सुरक्षित घर दे,यही इंसानियत की असली पहचान। स्थायी पुनर्वास तक अस्थायी छत की मांग-ज्ञापन में प्रभावितों ने साफ लिखा है कि जब तक स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती,उन्हें अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री डॉ.धन सिंह रावत को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। प्रमुख प्रभावित परिवार-इस आपदा की मार झेल रहे परिवारों में राकेश नैथानी,शकुंतला देवी,नीरज नैथानी,अरुण रावत,प्रकाश मैखुरी,वासुदेव कंडारी,सुधा देवी,विकास सिंह और सरोजनी गुसाईं शामिल हैं। सरकार और प्रशासन से संभावित समाधान-विशेषज्ञों का मानना है कि टीचर्स कॉलोनी को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करना ही एकमात्र स्थायी समाधान है। इसके लिए सरकार को तत्काल प्रभावित परिवारों को अस्थायी आवास या किराया भत्ता उपलब्ध कराना चाहिए। क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक जांच कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी आपदा दोबारा न हो। पुनर्वास हेतु नवीन आवासीय कॉलोनी का विकास शीघ्र शुरू किया जाए। प्रभावितों को आपदा राहत पैकेज और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। पीड़ितों की पुकार-दरारों में बिखरते सपनों को अब सहारे की जरूरत है। जीवन सुरक्षा है सरकार की पहली जिम्मेदारी। विस्थापन दो,राहत दो यही है इंसानियत की असली निशानी।

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