
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी गढ़वाल। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूकता को सशक्त करने की दिशा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) पौड़ी गढ़वाल में जनपद के माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित साइबर सेफ्टी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिवस पर मुख्य संदर्भदाता के रूप में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के साइबर एम्बेसडर डॉ.अतुल बमराड़ा उपस्थित रहे। अपने संबोधन में डॉ.बमराड़ा ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप,फिशिंग,ऑनलाइन ठगी,सोशल मीडिया दुरुपयोग,सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन,डेटा गोपनीयता एवं डिजिटल नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षक केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वे विद्यार्थियों,अभिभावकों और समाज को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यालयों के माध्यम से साइबर जागरूकता को जन-आंदोलन का रूप दें। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञ से सीधे संवाद के माध्यम से अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। प्रशिक्षण को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के उद्देश्य से छबी सेवा फाउंडेशन एवं मोन इंडिजिनस कल्चर एंड वेलफेयर सोसाइटी के सहयोग से एक साइबर सुरक्षा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया,जिसमें शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस प्रतियोगिता में तन्वी नेगी,आलोक जुयाल एवं संदीप कुमार चौहान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता का स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का सफल समन्वय डायट पौड़ी की आईटी प्रवक्ता शालिनी भट्ट द्वारा किया गया,जिनके कुशल संचालन से प्रशिक्षण सत्र सुचारु एवं प्रभावी रूप से संपन्न हुआ। संस्थान की प्रभारी प्राचार्य ममता राणा ने अपने संबोधन में इस प्रशिक्षण को अत्यंत ज्ञानवर्धक, उपयोगी एवं समयानुकूल बताते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों के लिए अनिवार्य हो गए हैं। उन्होंने भविष्य में भी साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल साक्षरता से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों की डिजिटल समझ को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्ध हुआ,बल्कि यह भी स्पष्ट हुआ कि जागरूक शिक्षक ही सुरक्षित डिजिटल समाज की मजबूत नींव रख सकते हैं।