
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। शिक्षा जगत के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बन गया,जब पौड़ी जनपद के पाबो विकास खण्ड अंतर्गत राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौंरखाल के प्रतिभाशाली शिक्षक डॉ.अतुल बमराड़ा को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया। यह चयन राज्य स्तरीय जूरी द्वारा किया गया था,जिसे शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मान्यता प्रदान की। इस उपलब्धि के अंतर्गत शिक्षा मंत्रालय ने डॉ.बमराड़ा को राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) की मूल्यवान पुस्तकों का विशेष उपहार प्रदान करने का निर्णय लिया है। इन पुस्तकों में भारतीय ज्ञान परंपरा,विज्ञान,भाषा,साहित्य,कला और शिक्षा के विविध पहलुओं को समाहित किया गया है,जो उनके शिक्षण कार्य को और भी समृद्ध बनाएंगे। डॉ.अतुल बमराड़ा पिछले एक दशक से विद्यालय शिक्षा में नवीन प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सफलतापूर्वक कक्षा-कक्ष तक पहुंचाया है। बुनियादी साक्षरता और अंकज्ञान को मजबूत बनाने,कला-संलग्न आर्ट-इंटीग्रेटेड शिक्षा,आनंदमय एवं अनुभवात्मक अधिगम,डिजिटल नवाचार और स्थानीय ज्ञान परंपरा को कक्षा से जोड़ने जैसे अनेक प्रयासों से उन्होंने बच्चों की सीखने की क्षमता में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। इन प्रयासों का ही परिणाम है कि विद्यालय में पढ़ने की संस्कृति,रचनात्मकता और 21वीं सदी की आवश्यक जीवन-कौशल का विकास निरंतर हो रहा है। उत्तराखण्ड के तीन शिक्षकों को सम्मान-डॉ.बमराड़ा के अलावा उत्तराखण्ड के चम्पावत जिले की शिक्षिका मंजुबाला और चमोली जिले की शिक्षिका रम्भा शाह को भी इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। जबकि पूरे देशभर से कुल 154 शिक्षकों का चयन इस सम्मान हेतु हुआ है। डॉ.बमराड़ा की इस उपलब्धि पर चौंरखाल विद्यालय के विद्यार्थी,अभिभावक,स्थानीय समुदाय और क्षेत्रीय शिक्षकों ने अपार हर्ष व्यक्त किया है। सभी का कहना है कि यह सम्मान केवल एक शिक्षक की उपलब्धि नहीं,बल्कि पूरे पाबों विकास खण्ड और पौड़ी जनपद के लिए गौरव का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पुस्तकें डॉ.बमराड़ा के अभिनव प्रयासों को और गति प्रदान करेंगी। ये पुस्तकें विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत साबित होंगी और ग्रामीण शिक्षा की दिशा बदलने में मील का पत्थर सिद्ध होंगी।