
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड पौड़ी की पट्टी पैडुलस्यूं अंतर्गत परसुन्डाखाल में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक मकरेंण मेले के द्वितीय दिवस का शुभारंभ श्रद्धा,परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के सुंदर संदेश के साथ हुआ। परसुन्डाखाल मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक राजकुमार पोरी ने देवदार का समलौण पौधा रोपित कर मेले को यादगार बनाया तथा प्रकृति संरक्षण का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम का संचालन समलौण आंदोलन की राज्य संयोजिका सावित्री देवी ममगाईं एवं जिला संयोजक पवन पटवाल ने संयुक्त रूप से किया। उन्होंने मकरेंण मेले की धार्मिक,सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मकर संक्रांति हिंदू संस्कृति का पावन पर्व है,जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का शुभारंभ होता है। इसी कारण यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान,विवाह,चूड़ाकर्म,गृह प्रवेश जैसे शुभ संस्कार किए जाते हैं तथा घर-घर में पारंपरिक व्यंजन तैयार होते हैं। इसी काल से धरती के उत्तरी गोलार्ध में दिन का समय बढ़ने लगता है,जो नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। मुख्य अतिथि विधायक राजकुमार पोरी ने अपने संबोधन में कहा कि मकरेंण मेला केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं,बल्कि हमारी लोकसंस्कृति,आस्था और प्रकृति से गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समलौण आंदोलन के माध्यम से प्रत्येक संस्कार और पर्व पर वृक्षारोपण की परंपरा भावी पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य की मजबूत नींव रखेगी। देवदार जैसे दीर्घायु वृक्षों का रोपण पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ सामाजिक चेतना का भी प्रतीक है। ब्लॉक प्रमुख अस्मिता रावत ने कहा कि समलौण पहल हमारी सांस्कृतिक विरासत को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से आह्वान किया कि वे जीवन के प्रत्येक शुभ अवसर पर पौधारोपण कर प्रकृति के प्रति अपना दायित्व निभाएं। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता से ही पर्यावरण संरक्षण का संकल्प साकार होगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण मिलेगा। कार्यक्रम में मेला समिति के अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत,कोषाध्यक्ष कुलदीप सिंह गुसाईं,संजय कठेत,प्रदीप रावत,पूर्व सैनिक उत्तम सिंह रावत,अध्यापिका प्रीति रावत,ऊषा देवी,पंडित बृजमोहन जोशी,हेमा देवी सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने समलौण पहल की सराहना करते हुए वनों को आग से बचाने और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की। परसुन्डाखाल का मकरेंण मेला इस प्रकार लोक-संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण चेतना का सशक्त मंच बनकर उभरा,जहां परंपरा और प्रकृति दोनों का समान सम्मान दिखाई दिया।