
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर श्रद्धा,आस्था और परंपरा का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला,जब 7 फरवरी को मां भगवती गौरा देवी मंदिर नवनिर्माण समिति सरणा की देखरेख में एवं समस्त ग्रामवासियों की गरिमामयी उपस्थिति में मां भगवती गौरा देवी की पवित्र शिला एवं निशान ध्वज (छत्र सहित) की विधिवत पूजा-अर्चना संपन्न हुई। मंदिर नवनिर्माण कार्य के शीघ्र प्रारंभ से पूर्व,परंपरागत धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए मां भगवती गौरा देवी की शिला एवं निशान ध्वज को निकटवर्ती दूसरे मंदिर में पूर्ण श्रद्धा एवं सुरक्षा के साथ स्थापित किया गया,ताकि वैदिक रीति-रिवाजों के अनुरूप पूजा-अनुष्ठान संपन्न हो सके। इस पावन अवसर पर संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। कार्यक्रम में समस्त ग्रामवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई, जिससे यह आयोजन एक सामूहिक धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव के रूप में परिवर्तित हो गया। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पंडितों द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना,हवन एवं शांति पाठ कर मां भगवती गौरा देवी मंदिर नवनिर्माण कार्य का शुभ दिन से विधिवत श्रीगणेश किया गया। पूजा-अनुष्ठान का सफल संचालन पंडित व्यास रतीश काला ,पंडित हरीश बहुगुणा,पंडित अरुण बहुगुणा अनी सहित अन्य विद्वान आचार्यों द्वारा किया गया। वहीं ढोल-दमाऊं की पावन गूंज ने समूचे वातावरण को देवमय बना दिया। इस अवसर पर प्रसिद्ध ढोल-दमाऊं वादक गुलाम दास एवं भारत भारती ने अपनी उत्कृष्ट वादन कला से कार्यक्रम को विशेष सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की। पूजा के दौरान मां भगवती गौरा देवी का दिव्य अवतरण हुआ और मां ने उपस्थित भक्तजनों पर कृपा एवं आशीर्वाद बरसाया। इस अलौकिक क्षण ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया। सभी श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति,समृद्धि एवं क्षेत्र कल्याण की कामना की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा,बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक,धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत का सजीव प्रतिबिंब बनकर उभरा। मां भगवती गौरा देवी मंदिर का नवनिर्माण भविष्य में क्षेत्र के धार्मिक,सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेगा।