
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भंडारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद पौड़ी के कल्जीखाल के ग्राम टंगरोली में आयोजित मां नंदा देवी के वार्षिक पूजन कार्यक्रम के रात्रि जागरण ने इस बार एक अनूठा संदेश भी दिया। श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण इस आयोजन में ग्राम प्रधान संजय रावत,समिति सदस्य संजय नेगी एवं सुरेंद्र सिंह रावत को विशेष रूप से आम का समलौण पौधा भेंट किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित न रहकर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना था। पौधे के संरक्षण और पालन-पोषण की जिम्मेदारी समिति के सदस्य कोठियाल ने स्वयं ली। उन्होंने कहा कि नंदा देवी की कृपा से यह पौधा ग्रामवासियों के जीवन में सुख-शांति और हरियाली का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर जिला संयोजक पवन पटवाल अपनी धर्मपत्नी दीपा देवी के साथ उपस्थित रहे। वहीं ग्राम नलई से पहुंची मातृशक्ति देवकी रावत,राधा देवी,लक्ष्मी देवी,देवेश्वरी देवी,सरोजनी देवी और सोनिया देवी आदि ने अपनी सहभागिता से कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया। समलौण पौधे की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक महत्ता ग्रामीण परंपरा में समलौण पौधा केवल हरियाली का प्रतीक नहीं,बल्कि समृद्धि,दीर्घायु और शुभ फलदायी जीवन का प्रतीक माना जाता है। इसे घर-परिवार और समाज में सौभाग्य एवं मंगलकामना का द्योतक समझा जाता है। धार्मिक आयोजनों में पौधा भेंट करने की परंपरा,प्रकृति और श्रद्धा के गहरे संबंध को उजागर करती है। भक्ति और आस्था का संगम पूरे रात्रि जागरण में भक्तिमय वातावरण रहा। स्थानीय कलाकारों और भजन मंडलियों ने मां नंदा देवी के गुणगान करते हुए जागर और भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए। ढोल-दमाऊं,हारमोनियम और झांझ-मंजीरे की मधुर ध्वनि से पूरा गांव भक्ति रस में डूब गया। श्रद्धालु रातभर जय नंदा देवी माई की के जयकारे लगाते रहे। पेड़ लगाओ,जीवन बचाओ-हर पौधा है प्रकृति का उपहार,समलौण बनेगा हर घर का आधार। धार्मिक आस्था और कार्यक्रम की गरिमा नंदा देवी पूजन के इस वार्षिक आयोजन ने जहां एक ओर ग्रामीण समाज को भक्ति और आस्था में बांधा,वहीं पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर इसे और भी सार्थक बना दिया। सांस्कृतिक धरोहर और प्रकृति संरक्षण का यह संगम दर्शाता है कि परंपराएं केवल श्रद्धा का नहीं,बल्कि जीवन और पर्यावरण को संवारने का मार्ग भी दिखाती हैं।