नगर निगम में पारदर्शिता पर सवाल-स्ट्रीट लाइट पोलों की खरीद-स्थापना पर मांगी गई विस्तृत जानकारी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी श्रीनगर गढ़वाल। शहर में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर निगम श्रीनगर में स्ट्रीट लाइट पोलों की खरीद और स्थापना को

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

श्रीनगर गढ़वाल। शहर में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर निगम श्रीनगर में स्ट्रीट लाइट पोलों की खरीद और स्थापना को लेकर अब सूचना के अधिकार के तहत विस्तृत जानकारी मांगी गई है। यह पहल स्थानीय पार्षद झाबर सिंह रावत द्वारा की गई है,जिन्होंने नगर निगम प्रशासन से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्षद ने नगर निगम के लोक सूचना अधिकारी को प्रेषित पत्र के माध्यम से आरोप लगाया है कि शहर में लगाए गए स्ट्रीट लाइट पोलों से संबंधित कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की जा रही हैं,जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। ऐसे में उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है। पत्र में विशेष रूप से 7 फरवरी 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच खरीदे गए कुल स्ट्रीट लाइट पोलों की संख्या,संबंधित कंपनी का नाम-पता,प्रति पोल लागत और भुगतान से जुड़े समस्त प्रमाणों की सत्यापित प्रतियां मांगी गई हैं। इसके साथ ही शहर के विभिन्न मार्गों जैसे-बुघाणी रोड़ चुंगी से रतोड़ा बैण्ड,ग्लास हाउस मार्ग,डांग क्षेत्र से ऐठाणा तक तथा पराग दूध फैक्ट्री चौराहा से गंगा दर्शन मार्ग पर लगाए गए पोलों की संख्या और उन पर हुए खर्च का पूरा ब्यौरा भी मांगा गया है। पार्षद ने यह भी स्पष्ट किया है कि नगर निगम के अंतर्गत आने वाले सभी 40 वार्डों में लगाए गए स्ट्रीट लाइट पोलों का अलग-अलग विवरण,कुल लागत,ठेकेदारों की जानकारी तथा भुगतान प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। इतना ही नहीं,इन पोलों के लिए खरीदी गई केबल,एंगल,रॉड,क्लैंप एवं अन्य सामग्री की मात्रा और उनके भुगतान से संबंधित समस्त अभिलेख भी प्रस्तुत करने की मांग की गई है। इस आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सूचना उपलब्ध कराने हेतु निर्धारित शुल्क के रूप में 10 रुपये का भुगतान भी संलग्न किया गया है,जिससे स्पष्ट है कि यह मांग पूरी तरह विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत की गई है। यह मामला अब नगर निगम प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है,जहां पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर विभाग की कार्यशैली परखी जाएगी। यदि समयबद्ध और संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है,तो यह मामला आगे और तूल पकड़ सकता है। स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर विषय पर क्या रुख अपनाता है। यह पहल न केवल शहर में विकास कार्यों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है,बल्कि जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही और सक्रियता का भी एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।

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