
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। नगर निगम श्रीनगर क्षेत्रांतर्गत न्यू कमलेश्वर घाट के समीप अलकनंदा नदी का तट इन दिनों सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते चिंता का विषय बना हुआ है। नदी के किनारे सुरक्षा दीवार का अभाव और कुछ स्थानों पर अधूरे एवं जर्जर सुरक्षा निर्माण के कारण यहां कभी भी गंभीर हादसा होने की आशंका बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस संवेदनशील स्थल पर मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण कराने की मांग एक बार फिर प्रमुखता से उठाई है। उनका कहना है कि जनसुरक्षा से जुड़ा यह मामला केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है,बल्कि लोगों के जीवन की सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार न्यू कमलेश्वर घाट के आसपास प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं। विशेषकर हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं और आसपास के नागरिक नदी तट की ओर आते-जाते रहते हैं। ऐसे में नदी किनारे पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई स्थानों पर नदी के किनारे ढलान और फिसलन होने के कारण असावधानीवश पैर फिसलने पर व्यक्ति सीधे नदी के तेज बहाव की चपेट में आ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। अलकनंदा नदी का जलस्तर मौसम और परिस्थितियों के अनुसार तेजी से बदलता रहता है। विशेषकर मानसून के दौरान तथा बांध से पानी छोड़े जाने की स्थिति में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय क्षेत्रों में खतरा और अधिक गंभीर हो जाता है। नदी का तेज बहाव आसपास के तटों का कटाव भी कर सकता है। ऐसे में न्यू कमलेश्वर घाट जैसे संवेदनशील स्थान पर मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण समय की आवश्यकता बन गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद श्रीनगर में अलकनंदा नदी के किनारे सुरक्षा और तटीय संरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए थे। इसके बावजूद नगर क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सुरक्षा दीवारों का निर्माण पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो पाया है। जहां कहीं दीवारें मौजूद हैं,वहां भी उनकी स्थिति और मजबूती का तकनीकी परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। लोगों का मानना है कि केवल अस्थायी इंतजामों से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन तथा सिंचाई विभाग से मांग की है कि न्यू कमलेश्वर घाट के समीप नदी के प्रवाह,तट की स्थिति और कटाव की संभावनाओं का तकनीकी सर्वेक्षण कराकर मजबूत एवं टिकाऊ सुरक्षा दीवार का निर्माण कराया जाए। इसके साथ ही नदी के खतरनाक किनारों पर चेन-बैरियर,रेलिंग और सुरक्षा चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं,ताकि आम नागरिकों और विशेषकर युवाओं को संभावित खतरे के प्रति सतर्क किया जा सके। उन्होंने यह भी मांग की कि नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में संवेदनशील घाटों पर आवाजाही नियंत्रित करने की व्यवस्था हो तथा आवश्यकतानुसार प्रशासन की ओर से निगरानी भी सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए,जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं और बाहर से आने वाले लोगों को भी सुरक्षित वातावरण मिल सके। न्यू कमलेश्वर क्षेत्र में सुरक्षा दीवार निर्माण की मांग उठाने वालों में शिव सिंह नेगी,जसपाल सिंह चौहान,गंभीर सिंह रौतेला,मोर सिंह नेगी,गोपाल सिंह रौतेला,मकान सिंह बर्तवाल,बीरेंद्र सिंह राणा,गिरीश बंगवाल,राधाकृष्णन डोभाल,रमेश बडोनी,आशाराम उनियाल,गिरीश उनियाल,डॉ.ताजबर सिंह कण्डारी,मनीष जोशी,चण्डी प्रसाद कंसवाल,श्रीधर नैथानी,बीरेंद्र सिंह बिष्ट,पवन नौटियाल,लाल सिंह नेगी,कमलेश बलूनी,रघुवीर सिंह बिष्ट सहित अनेक स्थानीय नागरिक शामिल हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन,नगर निगम और सिंचाई विभाग से इस जनहित के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद राहत और बचाव कार्य करने से बेहतर है कि संभावित खतरे को पहले ही समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। अब देखना यह है कि जनसुरक्षा से जुड़ी इस मांग पर संबंधित विभाग कितनी तत्परता दिखाते हैं और न्यू कमलेश्वर घाट को सुरक्षित बनाने की दिशा में कब तक ठोस पहल होती है।