हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
रुद्रप्रयाग/श्रीनगर गढ़वाल। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण और सतत पर्वतीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सतत पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता अनुसंधान केंद्र (सीएसईबीआर),ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय (जीईयू),देहरादून द्वारा जैव विज्ञान विभाग के सहयोग से दो दिवसीय सामुदायिक क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन 27–28 अक्तूबर 2025 को ग्राम घिमतोली,रुद्रप्रयाग में किया गया। यह कार्यशाला भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) भारत सरकार तथा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान (जीबीपीएनआईएचई) अल्मोड़ा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। इसका मुख्य विषय था ऑर्किड परागण संरक्षण-स्थानीय समुदायों के माध्यम से सतत पर्वतीय विकास की दिशा में प्रयास। कार्यक्रम का उद्घाटन सोमवार को मुख्य अतिथि डॉ.एस.पी.सुबुद्धि अध्यक्ष उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड उत्तराखंड सरकार द्वारा किया गया। उनके साथ रजत सुमन प्रभागीय वनाधिकारी रुद्रप्रयाग,डॉ.दिवाकर पंत तथा देवेंद्र सिंह पुंडीर सहायक वन संरक्षक,प्रो.आर.के.मैखुरी विभागाध्यक्ष पर्यावरण विज्ञान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर एवं ग्राम प्रधान कविता देवी उपस्थित रहीं। उद्घाटन अवसर पर केंद्र परिसर में एक ऑर्किड पॉलीहाउस का शुभारंभ भी किया गया,जिसका उद्देश्य क्षेत्र में ऑर्किड पौधों की प्रजातियों का संरक्षण और प्रसार है। कार्यशाला में 100 से अधिक प्रतिभागियों जिनमें महिला किसान,स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि,विद्यार्थी एवं सामुदायिक कार्यकर्ता शामिल थे। मुख्य अतिथि प्रो.आर.के.मैखुरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कृषि,पर्यावरण और जैव विविधता के समन्वय से ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। वहीं रजत सुमन (आईएफएस) ने कहा कि वन पंचायतों के माध्यम से ऑर्किड की खेती को बढ़ावा देना ग्रामीण विकास और सतत आजीविका के लिए मील का पत्थर साबित होगा। डॉ.एस.पी.सुबुद्धि ने स्थानीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा हिमालयी क्षेत्र असाधारण जैव विविधता और स्वदेशी ज्ञान का भंडार है। युवाओं को इन संसाधनों को समझकर उत्पाद विकास और उद्यमिता के क्षेत्र में नए अवसर तलाशने चाहिए। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समाज से जोड़ता है,बल्कि ग्रामीण समुदाय को सशक्त भी बनाता है। कार्यक्रम के पहले दिन वनस्पति विज्ञान,पर्यावरण विज्ञान,वानिकी और मृदा विज्ञान जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञों में प्रो.डी.एस.चौहान,डॉ.बी.पी.चमोला (एचएनबी गढ़वाल विश्वविद्यालय),प्रो.वी.पी.उनियाल,प्रो.मनु पंत (ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय),हरिराज सिंह एवं नवदीप ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान विद्यार्थियों द्वारा जैव विविधता संरक्षण विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। साथ ही ऑर्किड पौधों के प्रसार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित हुआ,जिसमें महिला किसानों को कम लागत में पौधों की देखभाल और प्रसार की तकनीक सिखाई गई। कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। पोस्टर प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। समापन सत्र में सामुदायिक सहभागिता,सतत जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय स्तर पर पर्यावरणीय चेतना को बढ़ाने के लिए निरंतर पहल करने का संकल्प लिया गया। कार्यशाला की झलक-ऑर्किड पॉलीहाउस उद्घाटन,विशेषज्ञ व्याख्यान,महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी एवं विद्यार्थियों द्वारा पोस्टर प्रदर्शनी कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रहे।