
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। नगर निगम श्रीनगर के बोर्ड गठन के एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित विकास कु एक साल कार्यक्रम में जहां विकास कार्यों की उपलब्धियों ने शहर की बदली तस्वीर को सामने रखा,वहीं महापौर आरती भण्डारी का सादगीपूर्ण,गरिमामय और पारंपरिक पहाड़ी परिधान लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। इस विशेष अवसर पर पहाड़ी वेशभूषा में नजर आई महापौर ने न केवल मंच की शोभा बढ़ाई,बल्कि यह संदेश भी दिया कि विकास की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों को थामे रखना उतना ही आवश्यक है। उनके परिधान में गढ़वाली संस्कृति की सोंधी खुशबू और परंपरा का आत्मीय भाव साफ झलक रहा था। महापौर आरती भण्डारी केवल विकास कार्यों की योजनाओं तक सीमित नहीं हैं,बल्कि वे हर सार्वजनिक मंच पर अपनी सांस्कृतिक पहचान को पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करती रही हैं। नगर निगम के औपचारिक कार्यक्रम हों या सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन,उनका पहाड़ी परिधान यह दर्शाता है कि आधुनिक प्रशासन और पारंपरिक विरासत एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं। उनका यह अंदाज बताता है कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने तक सीमित नहीं,बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी होता है। पहले भी दिखा पहाड़ी रंग गौरतलब है कि इससे पूर्व बैकुंठ चतुर्दशी मेले सहित कई अवसरों पर महापौर आरती भण्डारी को पहाड़ी परिधान में देखा गया था। हर बार स्थानीय नागरिकों ने उनके इस रूप की सराहना की और इसे गढ़वाली संस्कृति के सम्मान से जोड़ा। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब कोई जनप्रतिनिधि स्वयं पारंपरिक परिधान और लोक-संस्कृति को अपनाता है,तो समाज में भी परंपराओं के प्रति गर्व और आत्मीयता का भाव स्वतः मजबूत होता है। महापौर का यह सांस्कृतिक रूप नई पीढ़ी के लिए भी एक प्रेरणा बनकर उभरा है। उनका पहाड़ी परिधान यह संदेश देता है कि आधुनिकता को अपनाते हुए भी अपनी भाषा,वेशभूषा और लोक-परंपराओं से जुड़े रहना गर्व की बात है। श्रीनगर की बनती नई पहचान आज महापौर आरती भण्डारी की यह सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे श्रीनगर की विशिष्ट पहचान बनती जा रही है,जहां विकास की योजनाओं के साथ-साथ परंपरा,संस्कार और स्थानीय आत्मा को भी समान महत्व दिया जा रहा है।