
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। उत्तराखंड में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने के संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई,जिसमें राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष स्पष्ट रूप से यह मुद्दा रखा कि पूर्व में गठित समिति की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया जा चुका है कि पुरानी पेंशन बहाली राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इस पर मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की मांग को गंभीरता से लेते हुए इसे न्यायोचित बताया और आश्वस्त किया कि वे इस विषय को देश के प्रधानमंत्री के समक्ष सशक्त रूप से उठाएंगे,ताकि इस दिशा में ठोस पहल हो सके। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अवगत कराया कि वर्तमान में लागू नई पेंशन योजना तथा एकीकृत पेंशन व्यवस्था जैसी प्रणालियां कर्मचारियों के भविष्य को पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं कर पा रही हैं। कर्मचारियों में अपने सेवानिवृत्ति उपरांत जीवन को लेकर असुरक्षा और चिंता का माहौल है। ऐसे में पुरानी पेंशन व्यवस्था ही एकमात्र ऐसा विकल्प है,जो उन्हें सामाजिक सुरक्षा,आर्थिक स्थिरता और सम्मानजनक जीवन की गारंटी प्रदान कर सकती है। राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल एवं संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के विभिन्न विभागों के अधिकारी,शिक्षक और कर्मचारी संगठन इस आंदोलन के समर्थन में एकजुट हैं और लगातार पुरानी पेंशन बहाली के लिए संघर्षरत हैं। यह केवल एक मांग नहीं,बल्कि लाखों कर्मचारियों के भविष्य और उनके परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर विषय बन चुका है। बैठक के उपरांत राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार कर्मचारियों की भावनाओं,उनकी वर्षों की सेवा और भविष्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं,बल्कि सामाजिक और मानवीय सरोकारों से जुड़ा एक व्यापक जनआंदोलन बन चुका है,जिस पर सरकार की अगली पहल पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।