
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। जनपद को क्षय रोग (टीबी) से पूर्णतः मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने निर्णायक पहल करते हुए फरवरी के अंतिम सप्ताह से 100 दिन का विशेष सघन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत संचालित किया जाएगा,जिसका उद्देश्य जनपद की सभी ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित करना है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.शिव मोहन शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली गई है और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण भी संपन्न कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं,बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा स्वास्थ्य आंदोलन है,जिसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भूमिका आवश्यक है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों,मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप से पीड़ित मरीजों तथा धूम्रपान करने वालों की विशेष जांच करेंगी। संदिग्ध व्यक्तियों की थूक जांच (स्पुटम टेस्ट) और एक्स-रे के माध्यम से समय रहते रोग की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में आशा कार्यकत्रियों और एएनएम द्वारा घर-घर सर्वे कर संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी,ताकि कोई भी संक्रमित व्यक्ति उपचार से वंचित न रह जाए। टीबी मुक्त जनपद में कुल 1166 ग्राम पंचायतों में से 609 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। इनमें 157 ग्राम पंचायतें लगातार तीन वर्षों से 229 ग्राम पंचायतें दो वर्षों से तथा 283 ग्राम पंचायतें पहली बार टीबी मुक्त घोषित हुई हैं। यह उपलब्धि विभाग की सतत निगरानी और सामुदायिक सहयोग का परिणाम है। अभियान के दौरान टीबी के लक्षणों की पहचान,समय पर जांच,नियमित एवं पूर्ण उपचार,दवा का सतत सेवन तथा सामुदायिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि टीबी का उपचार संभव है,बशर्ते रोगी समय पर जांच कराए और निर्धारित अवधि तक दवा का नियमित सेवन करे। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि सतर्कता,निरंतर प्रयास और सामुदायिक सहभागिता से ही टीबी मुक्त जनपद का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी,बुखार,वजन में कमी या कमजोरी जैसे लक्षण हों तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। जनपद पौड़ी अब टीबी उन्मूलन की दिशा में निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है-आवश्यक है कि प्रशासन और जनता मिलकर इस मुहिम को जनआंदोलन का स्वरूप दें,ताकि आने वाली पीढ़ियों को टीबी जैसी बीमारी से मुक्त और स्वस्थ भविष्य मिल सके।