वन पंचायतों की सक्रिय भूमिका से ही संभव है जंगल और जन-जीवन की सुरक्षा–प्रभागीय वनाधिकारी

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। वन एवं जन-जीवन के बीच बढ़ते टकराव को कम करने और आगामी फायर सीजन को देखते हुए सिविल एवं सोयम वन प्रभाग पौड़ी की पौड़ी रेंज द्वारा शुक्रवार को प्रभाग दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन पंचायत स्तर से सरपंचों एवं पंचायत सदस्यों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की,जिससे यह आयोजन संवाद और समाधान का प्रभावी मंच बनकर उभरा। बैठक को संबोधित करते हुए प्रभागीय वनाधिकारी पवन नेगी ने हाल के वर्षों में लगातार बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ना केवल वन विभाग की चुनौती नहीं,बल्कि इसमें वन पंचायतों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को वन्यजीवों से बचाव के उपायों,सतर्कता बरतने,सामूहिक निगरानी तथा आपात स्थिति में त्वरित सूचना देने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। वनाग्नि रोकथाम को लेकर तैयारी और समन्वय पर जोर प्रभागीय वनाधिकारी ने आगामी वनाग्नि सत्र को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा की जा रही तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाती है,बल्कि मानव जीवन,वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनती है। उन्होंने वन पंचायत स्तर पर अग्नि सुरक्षा समितियों को सक्रिय करने,फायर लाइनों की समय पर सफाई,संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और विभाग के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वनाग्नि की रोकथाम में स्थानीय लोगों की सहभागिता सबसे अहम कड़ी है और समय रहते की गई छोटी पहल बड़े नुकसान को टाल सकती है। बैठक के दौरान वन पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष,फसल क्षति,वनाग्नि की घटनाओं तथा अन्य वन संबंधी समस्याओं को साझा किया। अधिकारियों द्वारा समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया तथा आपसी समन्वय से कार्य करने पर सहमति बनी। कार्यक्रम में उप प्रभागीय वनाधिकारी राखी जुयाल,वन क्षेत्राधिकारी पौड़ी रेंज भूपेंद्र सिंह रावत,अनुभाग अधिकारी अरविंद रावत,वन बीट अधिकारी नरोत्तम प्रसाद सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। प्रभाग दिवस के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि वन संरक्षण,मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और वनाग्नि नियंत्रण तभी संभव है जब विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर साझा जिम्मेदारी निभाएं। इस आयोजन ने संवाद,सहयोग और सामूहिक समाधान की दिशा में एक सकारात्मक पहल की।