प्रदेश सरकार की योजनाओं से आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं थल्ली की साधना रावत

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश सरकार कि ग्रामोत्थान परियोजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की मजबूत कड़ी बनकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महिला सशक्तिकरण और

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। प्रदेश सरकार कि ग्रामोत्थान परियोजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बदलाव की मजबूत कड़ी बनकर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली नीति का असर अब गांवों तक साफ दिखायी देने लगा है। जनपद पौड़ी के विकासखंड पौड़ी अंतर्गत ग्राम थल्ली की रहने वाली साधना रावत की सफलता इसकी जीवंत मिसाल है। जिन्होंने ग्रामोत्थान परियोजना और एनआरएलएम से जुड़कर आत्मनिर्भरता की रहा पकड़ी हुई गांव में एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचान बनाई है और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है। साधना रावत ग्रामोत्थान परियोजना से जुड़ने से पहले सामान्य जीवन जी रही थी। परिवार की आजीविका मजदूरी और खेती पर निर्भर थी। ग्रामोत्थान परियोजना के स्टाफ द्वारा ग्राम पंचायत थल्ली में इन्टरप्राइजेज गतिविधि के अंतर्गत सर्वे किया गया। मानकों के आधार पर साधना रावत का चयन रिटेल शॉप गतिविधि के लिए लाभार्थी के रूप में किया गया। भौतिक सत्यापन के बाद परियोजना के तहत कुल एक लाख रुपये की गतिविधि लागत में 30 हजार रुपये की सहयोग राशि उपलब्ध करायी गयी। इसके साथ ही सहकारी समिति से 50 हजार रुपये का ब्याज रहित ऋण तथा सीआईएफ से 50 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने गांव में रिटेल शॉप शुरू की। पहले साधना रावत केवल कृषि कार्य करती थीं और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। दुकान खुलने के बाद उनकी स्थिति में बड़ा बदलाव आया। वर्तमान में वह दुकान का संचालन नियमित रूप से कर रही हैं। साधना की दुकान से प्रतिमाह लगभग 70 से 80 हजार रुपये का व्यवसाय हो रहा है। उनकी दुकान की दैनिक बिक्री 7 से 9 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। बताया गया कि उनका शुद्ध वार्षिक लाभ करीब 80 हजार रुपये है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। उनकी दुकान पर रोजमर्रा का सामान आसानी से उपलब्ध होने के कारण आसपास के गांवों के लोग भी वहीं से खरीददारी कर रहे हैं। इससे एक ओर ग्रामीणों को सुविधा मिली है तो दूसरी ओर साधना रावत का व्यवसाय भी लगातार आगे बढ़ रहा है। ग्रामोत्थान परियोजना,एनआरएलएम और सीएलएफ के माध्यम से समय-समय पर बैठकों का आयोजन कर उन्हें योजनाओं की जानकारी और आजीविका संवर्द्धन से जुड़े प्रशिक्षण की जानकारी भी दी जा रही है। परियोजना स्टाफ द्वारा उनके कार्य का मूल्यांकन कर नियमित मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। साधना रावत ने कहा पहले घर चलाना बहुत मुश्किल होता था और हमें योजनाओं की जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि ग्रामोत्थान परियोजना और एनआरएलएम से जुड़ने के बाद मुझे सहयोग मिला और आज मैं अपनी दुकान चला पा रही हूं। अब परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। उन्होंने इस सफलता को हासिल करने के लिए ग्रामोत्थान,एनआरएलएम और उमंग सीएलएफ स्टाफ का धन्यवाद भी किया। उन्होंने यह भी कहा कि आगे का लक्ष्य दुकान को और बड़ा करूं। ग्रामोत्थान परियोजना प्रबंधक कुलदीप बिष्ट ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। साधना रावत की सफलता यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिले तो महिलाएं गांव में रहकर भी अच्छा व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से आगे भी अधिक से अधिक महिलाओं को उद्यम गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

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