प्राविधिक स्वयंसेवकों को सामुदायिक मध्यस्थता का विशेष प्रशिक्षण,न्यायिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के संकल्प के साथ दक्षता संवर्धन पर जोर

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। न्याय को जनसामान्य के द्वार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशानुसार तथा जिला जज/अध्यक्ष जिला विधिक

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

पौड़ी/श्रीनगर गढ़वाल। न्याय को जनसामान्य के द्वार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशानुसार तथा जिला जज/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पौड़ी गढ़वाल के मार्गदर्शन में पराविधिक स्वयंसेवकों की मासिक बैठक के साथ एक दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नाजिश कलीम के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पराविधिक स्वयंसेवकों की कार्यकुशलता को सुदृढ़ करना तथा उन्हें सामुदायिक स्तर पर उत्पन्न होने वाले विवादों के शांतिपूर्ण,त्वरित एवं वैकल्पिक समाधान के लिए सक्षम बनाना रहा। सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का लक्ष्य केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं,बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्यायिक सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वयंसेवकों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में विधिक जागरूकता गतिविधियों को सक्रिय रूप से संचालित करें और आमजन को निःशुल्क विधिक सहायता,लोक अदालत,मध्यस्थता एवं सुलह की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दें। छोटे विवादों का स्थानीय समाधान-बड़े मुकदमों से राहत प्रशिक्षण सत्र में सामुदायिक मध्यस्थता की उपयोगिता पर विशेष प्रकाश डाला गया। बताया गया कि पारिवारिक,सामाजिक तथा पड़ोसी स्तर के छोटे-छोटे विवादों को प्रारंभिक स्तर पर ही संवाद,समझदारी और आपसी सहमति से सुलझाया जाए तो न केवल न्यायालयों पर लंबित मामलों का भार कम होगा,बल्कि समाज में आपसी विश्वास और सौहार्द भी सुदृढ़ होगा। विशेषज्ञों द्वारा मध्यस्थता की प्रक्रिया,प्रभावी संवाद कौशल,निष्पक्षता,गोपनीयता,विश्वास निर्माण और व्यवहारिक दृष्टिकोण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई। उदाहरणों के माध्यम से विवाद समाधान की व्यावहारिक प्रक्रिया समझाते हुए बताया गया कि मध्यस्थ की भूमिका निष्पक्ष मार्गदर्शक की होती है,जो दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर समाधान का मार्ग प्रशस्त करता है। सचिव ने स्वयंसेवकों से अपेक्षा की कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए अपने क्षेत्रों में जरूरतमंद एवं पात्र व्यक्तियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का लाभ तभी सार्थक होगा,जब पराविधिक स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर जागरूकता और विश्वास का सेतु बनेंगे। सक्रिय सहभागिता कार्यक्रम में मध्यस्थ जयदर्शन बिष्ट,आमोद नैथानी,राजकुमार बत्रा सहित सभी पराविधिक स्वयंसेवकों की सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे उन्नयन कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न्याय तक सरल, सुलभ और त्वरित पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है,जो समाज में वैकल्पिक विवाद समाधान की संस्कृति को मजबूत करेगा और न्यायिक सेवाओं को वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लक्ष्य को साकार करेगा।

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