
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। भारत रत्न डॉ.भीमराव रामजी अम्बेडकर की 135 वीं जयंती के पावन अवसर पर एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर स्थित डॉ.अंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं सिविल सेवा निःशुल्क कोचिंग योजना के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य,गरिमामय एवं अत्यंत प्रेरणादायक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने न केवल अकादमिक वातावरण को जीवंत किया,बल्कि सामाजिक न्याय,समानता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति नई चेतना का संचार भी किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यवाहक कुलपति प्रो.एन.एस.पंवार द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का जीवन भारतीय समाज के लिए एक प्रकाशस्तंभ है,जो हमें हर परिस्थिति में न्याय और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम का संयोजन प्रो.एम.एम.सेमवाल द्वारा किया गया। उन्होंने प्रस्तावना रखते हुए डॉ.अम्बेडकर के जीवन दर्शन की गहराई को रेखांकित करते हुए कहा कि उनका सम्पूर्ण जीवन मानव गरिमा,सामाजिक समता और न्याय की स्थापना के लिए समर्पित रहा। बाबासाहेब का संघर्ष किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था,बल्कि उन्होंने संपूर्ण मानवता के अधिकारों की लड़ाई लड़ी। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने डॉ.अम्बेडकर के बहुआयामी व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रो.एम.एस.पंवार ने भारतीय संविधान के निर्माण में बाबासाहेब की अतुलनीय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं,बल्कि करोड़ों वंचितों के सपनों का जीवंत प्रतिबिंब है। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था की संवैधानिक आवश्यकता और उसके सामाजिक महत्व को भी विस्तार से समझाया। विश्वविद्यालय के इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में डॉ.अम्बेडकर के महिला अधिकारों के प्रति दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए बताया कि बाबासाहेब ने समाज में महिलाओं को समान अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कार्य किए। साथ ही उन्होंने छात्र-छात्राओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। प्रो.ओ.पी.गुसाईं ने शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के क्षेत्र में डॉ.अम्बेडकर के योगदान की विस्तृत व्याख्या करते हुए उनके प्रसिद्ध मंत्र शिक्षित बनो,संगठित रहो और संघर्ष करो को आज के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब का जीवन संघर्ष,आत्मविश्वास और उत्कृष्टता की मिसाल है,जो युवा पीढ़ी को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। प्रो.दीपक कुमार ने सामाजिक समता के संदर्भ में बाबासाहेब के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि जाति व्यवस्था के विरुद्ध उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय अस्मिता की पुनर्स्थापना का आंदोलन था। उन्होंने बाबासाहेब की चर्चित कृति एनिहिलेशन ऑफ कास्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं। कार्यक्रम में सिविल सेवा कोचिंग योजना के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए बाबासाहेब के जीवन से प्रेरणा ग्रहण करने की बात कही। छात्रों ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद डॉ.अम्बेडकर ने Columbia University और London School of Economics जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर यह सिद्ध किया कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान डॉ.अंबेडकर उत्कृष्टता केंद्र के समर्पित शिक्षकों में डॉ.आशीष बहुगुणा,डॉ.प्रकाश सिंह,डॉ.मुकेश सहाय,डॉ.शैलेन्द्र चमोला एवं डॉ.वीर सिंह की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन को और भी प्रभावशाली बनाया। इन शिक्षकों ने छात्रों को बाबासाहेब के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। समारोह के अंत में सभी प्राध्यापकों,शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से बाबासाहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह संकल्प लिया कि वे उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए समाज में समता,न्याय और भाईचारे की स्थापना हेतु अपना योगदान देंगे। कार्यक्रम का समापन प्रो.सीमा धवन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया,जबकि मंच संचालन डॉ.आशीष बहुगुणा ने प्रभावशाली ढंग से किया। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था,बल्कि एक विचार क्रांति का संदेश भी-जो आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करता रहेगा।