
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। बैकुंठ चतुर्दशी मेले के तहत आयोजित स्व.हुकुम सिंह नेगी स्मृति महिला वॉलीबॉल प्रतियोगिता ने इस वर्ष महिला खिलाड़ियों के उत्साह और कौशल का शानदार प्रदर्शन पेश किया। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन मैदान में हुए इस प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले ने दर्शकों को बांधे रखा और मैदान तालियों की गूंज से गूंजता रहा। प्रतियोगिता में कुल 12 टीमों ने भाग लिया जो प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई थीं। तीन दिनों तक चले मुकाबलों में खिलाड़ियों ने अपने शानदार सर्विस,ब्लॉक और स्मैश से दर्शकों को रोमांचित किया। बुधवार को खेले गए सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबले में खिलाड़ियों ने न केवल तकनीकी निपुणता दिखाई,बल्कि संघर्ष की ऐसी मिसाल पेश की कि हर अंक पर मैदान में तनाव और उत्साह दोनों महसूस हुआ। फाइनल मुकाबला रांशी स्टेडियम पौड़ी और देहरादून टीम के बीच खेला गया। यह मुकाबला वाकई रोमांच का चरम साबित हुआ-हर सेट में बढ़त बदलती रही,कभी देहरादून आगे तो कभी पौड़ी। अंतिम क्षणों तक मुकाबले का परिणाम अनिश्चित रहा,लेकिन पौड़ी की टीम ने अदम्य हौसले और बेहतर तालमेल के बल पर सिर्फ एक अंक के अंतर से जीत दर्ज कर विजेता ट्रॉफी अपने नाम कर ली। विजेता रांशी स्टेडियम पौड़ी टीम को 31,000 रुपए की नगद राशि और उपविजेता देहरादून टीम को 21,000 रुपए की नगद धनराशि बसंती नेगी द्वारा प्रदान की गई। समारोह के दौरान पूरे मैदान में खिलाड़ियों के सम्मान में गूंजते तालियों के स्वर महिला खेल भावना की नई परिभाषा रच रहे थे। नगर निगम श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी ने विजेता टीम को ट्रॉफी भेंट कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा यह मुकाबला न केवल रोमांचक था,बल्कि महिला खिलाड़ियों की प्रतिभा,संघर्ष और आत्मविश्वास का शानदार उदाहरण भी रहा। आज बेटियां हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और ऐसे आयोजन उन्हें अपने सपनों को पंख देने का मंच प्रदान करते हैं। उन्होंने आयोजन समिति,निर्णायक मंडल,सहयोगी संस्थाओं और दर्शकों का आभार व्यक्त करते हुए प्रतियोगिता की सफलता को महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बताया। इस अवसर पर स्थानीय नागरिकों,विद्यार्थियों,खेल प्रेमियों और विश्वविद्यालय समुदाय की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। मैदान में दर्शकों का उत्साह यह संदेश दे रहा था कि बैकुंठ चतुर्दशी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि सांस्कृतिक और खेलीय समरसता का उत्सव बन चुका है।