
हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी
श्रीनगर गढ़वाल। पावन हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीनगर में आस्था,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम देखने को मिला। नगर स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित अखंड रामायण पाठ,हवन-यज्ञ और विशाल भंडारे ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया। हर ओर जय श्रीराम और जय बजरंगबली के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे,जिससे श्रद्धालुओं के हृदय भक्ति भाव से ओत-प्रोत हो उठे। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने संकटमोचक हनुमान महाराज के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित कर अपने जीवन में सुख,शांति और शक्ति की कामना की। अखंड रामायण पाठ के मधुर स्वर और हवन की दिव्य अग्नि से वातावरण आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो उठा। यज्ञ की पवित्र ध्वनि और मंत्रोच्चार ने मानो सम्पूर्ण नगर को एक आध्यात्मिक साधना में जोड़ दिया। भव्य शोभायात्रा इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही,जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में संपन्न हुई। भजन-कीर्तन,ढोल-नगाड़ों और जयघोषों के साथ निकली यह यात्रा श्रद्धा और उत्साह का जीवंत प्रतीक बन गई। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया,जिससे वातावरण और भी भक्तिमय हो उठा। मंदिर के पुजारी भगवती प्रसाद जी ने इस अवसर पर कहा कि हनुमान का जीवन सेवा,समर्पण,बल और विनम्रता का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलता है,उस पर बजरंगबली की विशेष कृपा बनी रहती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए मंगलकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया,जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ अर्जित किया। आयोजन में व्यापार सभा अध्यक्ष दिनेश असवाल,हिमांशु अग्रवाल,सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र प्रसाद बर्थवाल,पंडित अरुण पुरोहित,पंडित सुशील,आयुष सेमवाल,गजेंद्र जोशी,देवी प्रसाद कपरवान,टीकाराम गैरोला,प्रदुमन रावल,प्रदुमन रावल,संदीप चमोली,पवन सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं भक्तगण उपस्थित रहे। यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज को एकसूत्र में पिरोने वाला सांस्कृतिक महाकुंभ बनकर सामने आया,जहां भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्रीनगर में मनाया गया यह हनुमान जन्मोत्सव न केवल श्रद्धा का प्रतीक बना,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म,संस्कृति और मानवीय मूल्यों की अमिट छाप भी छोड़ गया।