
हिमालय टाइम्स
गबर सिंह भंडारी
नई दिल्ली/श्रीनगर गढ़वाल। भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में प्रवासी श्रमिकों और आगंतुकों की समस्याएं लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही हैं। आर्थिक मजबूरियों,रोजगार की तलाश और बेहतर अवसरों की खोज में एक राज्य से दूसरे राज्य या शहरों की ओर पलायन करने वाले लाखों प्रवासी श्रमिक अक्सर रोजगार,भोजन,आवास,शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।भारतीय प्रवासी परिषद ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए देश और प्रदेश की सरकारों से कई ठोस कदम उठाने की अपील की हैं,परिषद का उद्देश्य प्रवासियों को उनके नए स्थान पर सुरक्षा,सम्मान और समान अवसर दिलाना है। भारतीय प्रवासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डॉ अजय तिवारी जी ने नीति आयोग से भी प्रवासियों और अस्थायी आगंतुकों के लिए डेटा संकलन की दिशा में कार्य करने की अपील की है,ताकि योजनाएं जमीनी हकीकत के आधार पर तैयार की जा सकें। परिषद के पिछले दिनों के संघर्ष के बाद ई-श्रम पोर्टल प्रवासी श्रमिकों के लिए एक बड़ा संसाधन बनकर उभरा है,जहां पंजीकरण के बाद उन्हें कई तरह की सरकारी सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। साथ ही एक राष्ट्र,एक राशन कार्ड योजना को संपूर्ण देश में प्रवासियों के लिए लागू करने की अपील की उन्होंने कहा ये योजना प्रवासियों के जीवनरेखा को ऊपर उठाने में एक सही योजना साबित होगी। इस योजना से प्रवासी चाहे किसी भी राज्य में हों,अपने राशन कार्ड के माध्यम से आवश्यक खाद्य सामग्री आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। परिषद उत्तराखंड सहित देश के सभी 29 राज्यों में बसे प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए आवास,शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ तिवारी यहीं नहीं रुके उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से प्रवासी परिवारों के लिए आयुष्मान भारत जैसी योजनाएं स्वास्थ्य कवरेज को आसान बनाने की दिशा में अपील की हैं। प्रवासियों को केवल रोजगार दिलाना ही नहीं,बल्कि उन्हें स्थानीय समाज में आपसी सामंजस्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अन्य बातें। इसके लिए डॉ तिवारी ने सामाजिक एकीकरण कार्यक्रमों के जरिए प्रवासियों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ा जाना और स्थानीय लोगों को प्रवासियों की मान्यताओं और परंपराओं और पर्वों को मिलकर मानना राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए बहुत जरूरी है,जिससे दोनों खुद को अलग अलग महसूस न करें और एक खुशी का माहौल स्थापित कर समाज की अगली पीढ़ी को एक नई दिशा दे सकें। परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कुमार धर्मेंद्र एडवोकेट ने कहा प्रवासियों को अक्सर कानूनी अधिकारों और प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं होती। इसे ध्यान में रखते हुए कानूनी सहायता सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर दिया जाना भी जरूरी है,ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रहें। इसके साथ ही डॉ.कुमार ने कहा परिषद बहुत जल्द देश के सभी प्रवासियों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी जिसके बाद परामर्श और मार्गदर्शन सेवाएं प्रवासियों को नए माहौल में स्थापित होने और आत्मविश्वास से आगे बढ़ने में मदद करेंगी। प्रवासियों का योगदान और भविष्य-भारत के विकास में प्रवासियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहरों की फैक्ट्रियों से लेकर खेतों तक,निर्माण कार्य से लेकर घरेलू सेवा तक,प्रवासी श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इसलिए,उनके जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाना केवल सामाजिक न्याय ही नहीं,बल्कि आर्थिक प्रगति की अनिवार्यता भी है। प्रवासी हैं भारत की शक्ति,उनका सम्मान है हमारी भक्ति।