मनरेगा पर नाम परिवर्तन का विरोध तेज,जखोली में कांग्रेस का हल्ला बोल

हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी रुद्रप्रयाग/जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन (वीबीजी-रामजी) किए जाने के फैसले के विरोध

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हिमालय टाइम्स गबर सिंह भण्डारी

रुद्रप्रयाग/जखोली/श्रीनगर गढ़वाल। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन (वीबीजी-रामजी) किए जाने के फैसले के विरोध में कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड जखोली मुख्यालय परिसर में डाॅ.भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा के समक्ष कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए एक दिवसीय सांकेतिक उपवास रखा। पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रदीप थपलियाल के नेतृत्व में आयोजित इस उपवास कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेसजन शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक उपवास रखकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। इस मौके पर कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बदलाव केवल योजना के नाम तक सीमित नहीं है,बल्कि यह मनरेगा की मूल अवधारणा और आत्मा पर सीधा प्रहार है। नेताओं ने कहा कि वर्ष 2005 में शुरू की गई मनरेगा योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को काम की गारंटी,समय पर मजदूरी और जवाबदेही सुनिश्चित करना था,जिसे नए स्वरूप में कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पहले ग्रामीण मजदूर अपनी ग्राम पंचायत में सीधे काम की मांग कर सकते थे,लेकिन अब यह अधिकार सीमित कर दिया गया है और यह तय करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास चला गया है कि किस गांव में काम होगा और किसमें नहीं। प्रदर्शनकारियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में मनरेगा के तहत लाखों मजदूर पंजीकृत हैं,लेकिन बीते वर्षों में उनमें से केवल कुछ हजार लोगों को ही काम मिल पाया। कागजों में रोजगार के दिन भले ही 100 से 125 दिन दर्शाए जा रहे हों,लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मजदूरों को औसतन 40 दिन का काम भी नसीब नहीं हो रहा। इसके साथ ही कांग्रेस ने योजना के फंडिंग पैटर्न में बदलाव पर भी सवाल खड़े किए। नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों पर 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ डाल रही है,जिससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों के लिए इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करना बेहद कठिन हो जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को गांधीवादी विचारधारा का अपमान करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार लगातार उन योजनाओं और प्रतीकों को कमजोर कर रही है,जो सामाजिक न्याय और गरीब कल्याण से जुड़े हैं। नेताओं ने चेतावनी दी कि जिस तरह किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर सरकार को झुकने पर मजबूर किया था,उसी तरह कांग्रेस भी मनरेगा के मूल स्वरूप की बहाली तक अपना संघर्ष जारी रखेगी। आने वाले दिनों में यह आंदोलन न्याय पंचायतों और ग्राम पंचायत स्तर तक फैलाया जाएगा,जहां से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे। इस अवसर पर पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रदीप थपलियाल,कांग्रेस पूर्व ब्लाक अध्यक्ष सुरेंद्र सकलानी,ब्लॉक अध्यक्ष महावीर पंवार,ब्लाक प्रमुख विनीता चमोली,राज्य आंदोलनकारी हयात सिंह राणा,कनिष्ठ प्रमुख राजेंद्र सिंह रावत,पूर्व प्रधान हरीश पुंडीर,पूर्व प्रमुख चैन सिंह पंवार,भगत सिंह पुंडीर,धर्मपाल रावत,शर्मा लाल,पूर्व प्रधान शीला भंडारी,अरुणा नेगी,प्रकाश थपलियाल,सुषमा देवी,महिला मंगल दल अध्यक्ष तनुजा देवी सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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